भारतीय न्याय संहिता, 2023/अध्याय 6/120 / 358
120संस्वीकृति उद्दापित करने या विवश करके संपत्ति को वापस कराने के लिए स्वेच्छया उपहति या घोर उपहति कारित करना
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 63स्रोत
पुराना कानून
भारतीय दंड संहिता, 1860
आईपीसी से मिलान जल्द(1) जो कोई, इस प्रयोजन से स्वेच्छया उपहति कारित करता है कि उपहत व्यक्ति से या उससे हितबद्ध किसी व्यक्ति से कोई संस्वीकृति या कोई जानकारी, जिससे किसी अपराध या कदाचार का पता चल सके, उद्दापित की जाए या उपहत व्यक्ति या उससे हितबद्ध व्यक्ति को मजबूर किया जाए कि वह कोई सम्पत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति वापस करे, या करवाए, या किसी दावे या मांग की पुष्टि, या ऐसी जानकारी दे, जिससे किसी सम्पत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति को वापस कराया जा सके, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
दृष्टांत
(क) क, जो एक पुलिस अधिकारी है, य से यह संस्वीकृति कराने के लिए, कि उसने अपराध किया है उसे उत्प्रेरित करने के लिए यातना देता है । क इस धारा के अधीन अपराध का दोषी है ।
(ख) क, जो एक पुलिस अधिकारी है, ख से यह पता लगाने के लिए कि अमुक चुराई हुई सम्पत्ति कहां रखी है, उत्प्रेरित करने के लिए उसे यातना देता है । क इस धारा के अधीन अपराध का दोषी है ।
(ग) क, जो एक राजस्व अधिकारी है, राजस्व का वह बकाया, जो य द्वारा देय है, देने के लिए य को विवश करने के लिए उसे यातना देता है । क इस धारा के अधीन अपराध का दोषी है ।
(2) जो कोई, उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी प्रयोजन के लिए स्वेच्छया घोर उपहति कारित करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक हो सकेगी दंडनीय होगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
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