भारतीय न्याय संहिता, 2023/अध्याय 6/139 / 358
139भीख मांगने के प्रयोजनों के लिए शिशु का व्यपहरण या विकलांगीकरण
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 71–72स्रोत
पुराना कानून
भारतीय दंड संहिता, 1860
आईपीसी से मिलान जल्द(1) जो कोई, किसी शिशु का इसलिए व्यपहरण करता है या शिशु का विधिपूर्ण संरक्षक स्वयं न होते हुए शिशु की अभिरक्षा इसलिए अभिप्राप्त करता है कि ऐसा शिशु भीख मांगने के प्रयोजनों के लिए नियोजित या प्रयुक्त किया जाए, वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष से कम नहीं होगी, किंतु जो आजीवन कारावास तक की हो सकेगी, दण्डनीय होगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
(2) जो कोई, किसी शिशु को विकलांग इसलिए करता है कि ऐसा शिशु भीख मांगने के प्रयोजनों के लिए नियोजित या प्रयुक्त किया जाए, वह कारावास से, जिसकी अवधि बीस वर्ष से कम नहीं होगी, किन्तु जो आजीवन कारावास, जिससे उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए कारावास अभिप्रेत होगा, तक की हो सकेगी, और जुर्माने से भी, दण्डित किया जाएगा ।
(3) जहां कोई व्यक्ति, जो शिशु का विधिपूर्ण संरक्षक नहीं है, उस शिशु को भीख मांगने के प्रयोजनों के लिए नियोजित या प्रयुक्त करता है, वहां जब तक कि इसके प्रतिकूल साबित न कर दिया जाए, यह उपधारणा की जाएगी कि उसने इस उद्देश्य से उस शिशु का व्यपहरण किया था या अन्यथा उसकी अभिरक्षा अभिप्राप्त की थी कि वह शिशु भीख मांगने के प्रयोजनों के लिए नियोजित या प्रयुक्त किया जाए ।
(4) इस धारा में “भीख मांगने” से निम्नलिखित अभिप्रेत है—
(i) लोक स्थान में भीख की याचना या प्राप्ति, चाहे गाने, नाचने, भाग्य बताने, करतब दिखाने या चीजें बेचने के बहाने या अन्यथा करना
(ii) भीख की याचना करने या प्राप्ति के प्रयोजन से किसी निजी परिसर में प्रवेश करना ;
(iii) भीख अभिप्राप्त या उद्दापित करने के उद्देश्य से अपना या किसी अन्य व्यक्ति का या जीव-जन्तु का कोई जख्म, घाव, क्षति, विरूपता या रोग अभिदर्शित या प्रदर्शित करना ;
(iv) भीख की याचना करने या प्राप्ति के प्रयोजन से शिशु का प्रदर्शन के रूप में प्रयोग करना ।
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