भारतीय न्याय संहिता, 2023/अध्याय 6/122 / 358
122प्रकोपन पर स्वेच्छया उपहति या घोर उपहति कारित करना
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 64स्रोत
पुराना कानून
भारतीय दंड संहिता, 1860
आईपीसी से मिलान जल्द(1) जो कोई, गम्भीर और अचानक प्रकोपन पर स्वेच्छया उपहति कारित करता है, यदि न तो उसका आशय उस व्यक्ति से भिन्न, जिसने प्रकोपन दिया था, किसी व्यक्ति को उपहति कारित करने का है और न तो अपने द्वारा ऐसी उपहति कारित किया जाना सम्भाव्य जानता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
(2) जो कोई, गम्भीर और अचानक प्रकोपन पर स्वेच्छया घोर उपहति कारित करता है, यदि न तो उसका आशय उस व्यक्ति से भिन्न, जिसने प्रकोपन दिया था, किसी व्यक्ति को घोर उपहति कारित करने का है और न तो अपने द्वारा ऐसी घोर उपहति कारित किया जाना सम्भाव्य जानता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
स्पष्टीकरण—यह धारा उसी परंतुक के अध्यधीन हैं, जिनके अध्यधीन धारा 101 का अपवाद है ।
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