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भारतीय न्याय संहिता, 2023

भारतीय न्याय संहिता, 2023/अध्याय 3/19 / 358

19कार्य, जिससे अपहानि कारित होना संभाव्य है, किंतु जो आपराधिक आशय के बिना और अन्य अपहानि के निवारण के लिए किया गया है

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 23–24स्रोत

पुराना कानून

भारतीय दंड संहिता, 1860

आईपीसी से मिलान जल्द

कोई बात केवल इस कारण अपराध नहीं है कि वह यह जानते हुए की गई है कि उससे अपहानि कारित होना संभाव्य है, यदि वह अपहानि कारित करने के किसी आपराधिक आशय के बिना और व्यक्ति या संपत्ति को अन्य अपहानि का निवारण या परिवर्जन करने के प्रयोजन से सद्भावपूर्वक की गई है ।

स्पष्टीकरण—ऐसे मामले में यह तथ्य का प्रश्न है कि जिस अपहानि का निवारण या परिवर्जन किया जाना है, क्या वह ऐसी प्रकृति की थी और इतनी आसन्न थी कि वह कार्य, जिससे यह जानते हुए कि उससे अपहानि कारित होना संभाव्य है, करने की जोखिम उठाना न्यायानुमत या माफी योग्य था ।

दृष्टांत

(क) क, जो एक जलयान का कप्तान है, अचानक और अपने किसी त्रुटि या उपेक्षा के बिना अपने आपको ऐसी स्थिति में पाता है कि यदि उसने जलयान का मार्ग नहीं बदला, तो इससे पूर्व कि वह अपने जलयान को रोक सके वह बीस या तीस यात्रियों से भरी नाव ख को अनिवार्यतः टकराकर डुबा देगा, और अपना मार्ग बदलने से उसे केवल दो यात्रियों वाली नाव ग को डुबाने की जोखिम उठानी पड़ती है, जिसको वह संभवतः बचाकर निकल जाए । यहां, यदि क नाव ग को डुबाने के किसी आशय के बिना और नाव ख के यात्रियों को संकट से बचाने के प्रयोजन से सद्भावपूर्वक अपना मार्ग बदल देता है, यद्यपि वह नाव ग को ऐसे कार्य द्वारा टकराकर डुबा सकती है, जिससे ऐसे परिणाम का उत्पन्न होना वह संभाव्य जानता था, तथापि तथ्यतः यह पाया जाता है कि वह संकट, जिसे बचाने का उसका आशय था, जिससे नाव ग को डुबाने की जोखिम उठाना माफी योग्य है, तो वह किसी अपराध का दोषी नहीं है ।

(ख) क, एक बड़े अग्निकांड के समय आग को फैलने से रोकने के लिए घरों को गिरा देता है । वह इस कार्य को मानव जीवन या संपत्ति को बचाने के आशय से सद्भावपूर्वक करता है । यहां, यदि यह पाया जाता है कि निवारण की जाने वाली अपहानि इस प्रकृति की थी और इतनी आसन्न थी कि क का कार्य माफी योग्य है, तो क उस अपराध का दोषी नहीं है ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।