भारतीय न्याय संहिता, 2023/अध्याय 3/35 / 358
35शरीर और संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 28स्रोत
पुराना कानून
भारतीय दंड संहिता, 1860
आईपीसी से मिलान जल्दधारा 37 में अंतर्विष्ट निर्बन्धनों के अधीन रहते हुए, प्रत्येक व्यक्ति को अधिकार है कि वह—
(क) मानव शरीर पर प्रभाव डालने वाले किसी अपराध के विरुद्ध अपने शरीर और किसी अन्य व्यक्ति के शरीर की प्रतिरक्षा करे ;
(ख) किसी ऐसे कार्य के विरुद्ध, जो चोरी, लूट, रिष्टि या आपराधिक अतिचार की परिभाषा में आने वाला अपराध है, या जो चोरी, लूट, रिष्टि या आपराधिक अतिचार करने का प्रयत्न है, अपनी या किसी अन्य व्यक्ति की संपत्ति, चाहे चल हो या अचल, उसकी प्रतिरक्षा करे ।
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