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भारतीय न्याय संहिता, 2023

भारतीय न्याय संहिता, 2023/अध्याय 3/42 / 358

42ऐसे अधिकार का विस्तार मृत्यु से भिन्न कोई अपहानि कारित करने तक का कब होता है

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 30स्रोत

पुराना कानून

भारतीय दंड संहिता, 1860

आईपीसी से मिलान जल्द

यदि वह अपराध, जिसके किए जाने या किए जाने के प्रयत्न से प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार के प्रयोग का अवसर आता है, ऐसी चोरी, रिष्टि या आपराधिक अतिचार है, जो धारा 4 में विनिर्दिष्ट विवरणों में से किसी प्रकार का नहीं है, तो उस अधिकार का विस्तार स्वेच्छया मृत्यु कारित करने तक का नहीं होता, किन्तु उसका विस्तार धारा 37 में विनिर्दिष्ट निर्बंधनों के अधीन रहते हुए, दोषकर्ता की मृत्यु से भिन्न कोई अपहानि स्वेच्छया कारित करने तक का होता है । ः

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