भारतीय न्याय संहिता, 2023/अध्याय 3/41 / 358
41कब संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार मृत्यु कारित करने तक का होता है
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 30स्रोत
पुराना कानून
भारतीय दंड संहिता, 1860
आईपीसी से मिलान जल्दसंपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार, धारा 37 में विनिर्दिष्ट निर्बन्धनों के अधीन रहते हुए दोषकर्ता की मृत्यु या अन्य अपहानि स्वेच्छया कारित करने तक का है, यदि वह अपराध जिसके किए जाने के, या किए जाने के प्रयत्न के कारण उस अधिकार के प्रयोग का अवसर आता है, इसमें इसके पश्चात् प्रगणित भांतियों में से किसी भी भांति का है, अर्थात्:-
(क) लूट ;
(ख) सूर्यास्त के पश्चात् और सूर्योदय के पूर्व गृहभेदन ;
(ग) अग्नि या किसी विस्फोटक पदार्थ द्वारा रिष्टि, जो किसी ऐसे भवन, तंबू या जलयान को की गई है, जो मानव आवास के रूप में या संपत्ति की अभिरक्षा के स्थान के रूप में उपयोग में लाया जाता है ;
(घ) चोरी, रिष्टि या गृह-अतिचार, जो ऐसी परिस्थितियों में किया गया है, जिनसे युक्तियुक्ति रूप से यह आशंका कारित है कि यदि प्राइवेट प्रतिरक्षा के ऐसे अधिकार का प्रयोग न किया गया तो परिणाम मृत्यु या घोर उपहति होगा ।
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