भारतीय न्याय संहिता, 2023/अध्याय 3/43 / 358
43सम्पत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का प्रारंभ होना और बना रहना
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 30–31स्रोत
पुराना कानून
भारतीय दंड संहिता, 1860
आईपीसी से मिलान जल्दसम्पत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार,—
(क) तब प्रारंभ होता है, जब सम्पत्ति के संकट की युक्तियुक्त आशंका प्रारंभ होती है :
(ख) चोरी के विरुद्ध अपराधी के संपत्ति सहित पहुंच से बाहर हो जाने तक अथवा, या तो लोक प्राधिकारियों की सहायता अभिप्राप्त कर लेने तक या संपत्ति बरामद हो जाने तक बना रहता है ;
(ग) लूट के विरुद्ध तब तक बना रहता है, जब तक अपराधी किसी व्यक्ति की मृत्यु या उपहति, या सदोष अवरोध कारित करता रहता है या कारित करने का प्रयत्न करता रहता है, अथवा जब तक तत्काल मृत्यु का, या तत्काल उपहति का, या तत्काल वैयक्तिक अवरोध का, भय बना रहता है ;
(घ) आपराधिक अतिचार या रिष्टि के विरुद्ध तब तक बना रहता है, जब तक अपराधी आपराधिक अतिचार या रिष्टि करता रहता है ;
(ङ) सूर्यास्त के पश्चात् और सूर्योदय के पूर्व गृहभेदन के विरुद्ध तब तक बना रहता है, जब तक ऐसे गृहभेदन से आरंभ हुआ गृह-अतिचार होता रहता है ।
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