भारतीय न्याय संहिता, 2023/अध्याय 3/39 / 358
39कब ऐसे अधिकार का विस्तार मृत्यु से भिन्न कोई अपहानि कारित करने तक का होता है
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 30स्रोत
पुराना कानून
भारतीय दंड संहिता, 1860
आईपीसी से मिलान जल्दयदि अपराध धारा 38 में विनिर्दिष्ट विवरणों में से किसी प्रकार का नहीं है, तो शरीर की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार हमलावर की मृत्यु स्वेच्छया कारित करने तक का नहीं होता, किंतु इस अधिकार का विस्तार धारा 37 में विनिर्दिष्ट निर्बन्धनों के अधीन रहते हुए, हमलावर की मृत्यु से भिन्न कोई अपहानि स्वेच्छया कारित करने तक का होता है ।
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