भारतीय न्याय संहिता, 2023/अध्याय 3/30 / 358
30सम्मति के बिना किसी व्यक्ति के फायदे के लिए सद्भावपूर्वक किया गया कार्य
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 26–27स्रोत
पुराना कानून
भारतीय दंड संहिता, 1860
आईपीसी से मिलान जल्दकोई बात, जो किसी व्यक्ति के फायदे के लिए सद्भावपूर्वक, यद्यपि उसकी सम्मति के बिना की गई है, ऐसी किसी अपहानि के कारण अपराध नहीं है, जो उस बात से उस व्यक्ति को कारित हो जाए, यदि परिस्थितियां ऐसी हैं कि उस व्यक्ति के लिए यह असंभव हो कि वह अपनी सम्मति प्रकट करे या वह व्यक्ति सम्मति देने के लिए असमर्थ हो और उसका कोई संरक्षक या उसका विधिपूर्ण भारसाधक कोई दूसरा व्यक्ति न हो जिससे ऐसे समय पर सम्मति अभिप्राप्त करना संभव हो कि वह बात फायदे के साथ की जा सके :
परन्तु इस अपवाद का विस्तार,—
(क) साशय मृत्यु कारित करने या मृत्यु कारित करने का प्रयत्न करने पर नहीं होगा ;
(ख) मृत्यु या घोर उपहति के निवारण के या किसी घोर रोग या अंगशैथिल्य से मुक्त करने के प्रयोजन से भिन्न किसी प्रयोजन के लिए किसी ऐसी बात के करने पर नहीं होगा, जिसे करने वाला व्यक्ति जानता है कि उससे मृत्यु कारित होना संभाव्य है ;
(ग) मृत्यु या उपहति के निवारण के प्रयोजन से भिन्न किसी प्रयोजन के लिए स्वेच्छया उपहति कारित करने या उपहति कारित करने का प्रयत्न करने पर नहीं होगा ;
(घ) किसी ऐसे अपराध के दुष्प्रेरण पर नहीं होगा जिस अपराध के किए जाने पर इसका विस्तार नहीं है । दृष्टांत
(1) य अपने घोड़े से गिर गया और मूर्छित हो गया । क, एक शल्यचिकित्सक का यह विचार है कि य के कपाल पर शल्यक्रिया आवश्यक है । क, य की मृत्यु कारित करने का आशय न रखते हुए, किंतु सद्भावपूर्वक य के फायदे के लिए, य के स्वयं किसी निर्णय पर पहुंचने की शक्ति प्राप्त करने से पूर्व ही कपाल पर शल्यक्रिया करता है । क ने कोई अपराध नहीं किया ।
(2) य को एक बाघ उठा ले जाता है । यह जानते हुए कि संभाव्य है कि गोली लगने से य मर जाए, किंतु य का वध करने का आशय न रखते हुए और सद्भावपूर्वक य के फायदे के आशय से क उस बाघ पर गोली चलाता है । क की गोली से य को मृत्युकारक घाव हो जाता है । क ने कोई अपराध नहीं किया ।
(3 क, एक शल्यचिकित्सक, यह देखता है कि एक शिशु की ऐसी दुर्घटना हो गई है जिसका घातक साबित होना संभाव्य है, यदि शल्यक्रिया तुरंत न कर दी जाए । इतना समय नहीं है कि उस शिशु के संरक्षक से आवेदन किया जा सके । क, सद्भावपूर्वक शिशु के फायदे का आशय रखते हुए शिशु के अनुनय-विनय करने के बावजूद भी शल्यक्रिया करता है । क ने कोई अपराध नहीं किया ।
(4) एक शिशु य के साथ क एक जलते हुए घर में है । घर के नीचे लोग एक कंबल तान लेते हैं । क उस शिशु को यह जानते हुए कि संभाव्य है कि गिरने से वह शिशु मर जाए, किंतु उस शिशु को मार डालने का आशय न रखते हुए और सद्भावपूर्वक उस शिशु के फायदे के आशय से छत पर से नीचे गिरा देता है । यहां, यदि गिरने से वह शिशु मर भी जाता है, तो भी क ने कोई अपराध नहीं किया ।
स्पष्टीकरण—धारा 26, धारा 27 और इस धारा के अर्थ के अंतर्गत केवल धन संबंधी फायदा वह फायदा नहीं है ।
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