नई–पुरानी धाराmanzill.com
भारतीय न्याय संहिता, 2023

भारतीय न्याय संहिता, 2023/अध्याय 3/36 / 358

36ऐसे व्यक्ति के कार्य के विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार जो विकृत्तचित्त, आदि हो

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 28स्रोत

पुराना कानून

भारतीय दंड संहिता, 1860

आईपीसी से मिलान जल्द

जब कोई कार्य, जो अन्यथा कोई अपराध होता, उस कार्य को करने वाले व्यक्ति के बालकपन, समझ की परिपक्वता के अभाव, चित्त-विकृत्ति या मत्तता के कारण, या उस व्यक्ति के किसी भ्रम के कारण, अपराध नहीं है, तब प्रत्येक व्यक्ति उस कार्य के विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का वही अधिकार रखता है, जो वह उस कार्य के वैसा अपराध होने की दशा में रखता ।

दृष्टांत

(क) य, एक विकृत्तचित्त व्यक्ति, क को जान से मारने का प्रयत्न करता है । य किसी अपराध का दोषी नहीं है । किन्तु क को प्राइवेट प्रतिरक्षा का वही अधिकार है, जो वह य के स्वस्थचित्त होने की दशा में रखता ।

(ख) क रात्रि में एक ऐसे घर में प्रवेश करता है, जिसमें प्रवेश करने के लिए वह वैध रूप से हकदार है । य, सद्भावपूर्वक क को गृहभेदक समझकर, क पर आक्रमण करता है । यहां य इस भ्रम के अधीन क पर आक्रमण करके कोई अपराध नहीं करता है । किंतु क, य के विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का वही अधिकार रखता है, जो वह तब रखता, जब य उस भ्रम के अधीन कार्य न करता ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।