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भारतीय न्याय संहिता, 2023

भारतीय न्याय संहिता, 2023/अध्याय 3/28 / 358

28सम्मति, जिसके संबंध में यह ज्ञात हो कि वह भय या भ्रम के अधीन दी गई है

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 25–26स्रोत

पुराना कानून

भारतीय दंड संहिता, 1860

आईपीसी से मिलान जल्द

कोई सम्मति ऐसी सम्मति नहीं है, जैसी इस संहिता की किसी धारा से आशयित है,”-

(क) यदि वह सम्मति किसी व्यक्ति ने क्षति के भय के अधीन, या तथ्य के किसी भ्रम के अधीन दी है, और यदि कार्य करने वाला व्यक्ति यह जानता है, या उसके पास विश्वास करने का कारण है कि ऐसे भय या भ्रम के परिणामस्वरूप वह सम्मति दी गई थी ; या

(ख) यदि वह सम्मति ऐसे व्यक्ति ने दी है, जो चित्त-विकृति या मत्तता के कारण, उस बात की, जिसके लिए वह अपनी सम्मति देता है, प्रकृति और परिणाम को समझने में असमर्थ है ; या

(ग) जब तक कि संदर्भ से प्रतिकूल प्रतीत न हो, यदि वह सम्मति ऐसे व्यक्ति ने दी है, जो बारह वर्ष से कम आयु का है ।

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