भारतीय न्याय संहिता, 2023/अध्याय 3/40 / 358
40शरीर की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का प्रारंभ होना और बना रहना
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 30स्रोत
पुराना कानून
भारतीय दंड संहिता, 1860
आईपीसी से मिलान जल्दशरीर की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार उसी क्षण प्रारंभ हो जाता है, जब अपराध करने के प्रयत्न या धमकी से शरीर के संकट की युक्तियुक्त आशंका पैदा होती है, चाहे वह अपराध किया न गया हो, और वह तब तक बना रहता है जब तक शरीर के संकट की ऐसी आशंका बनी रहती है ।
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