भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 16/375 / 570
340सदोष परिरोध
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यह धारा बदल दी गई है
भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू
1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।
जो कोई किसी व्यक्ति का इस प्रकार सदोष अवरोध करता है कि उस व्यक्ति को निश्चित परिसीमा से परे जाने से निवारित कर दे, वह उस व्यक्ति का “सदोष परिरोध” करता है, यह कहा जाता है ।
दृष्टांत
(क) य को दीवार से घिरे हुए स्थान में प्रवेश कराकर क उसमें ताला लगा देता है । इस प्रकार य दीवार की परिसीमा से परे किसी भी दिशा में नहीं जा सकता । क ने य का सदोष परिरोध किया है ।
(ख) क एक भवन के बाहर जाने के द्वारों पर बन्दूकधारी मनुष्यों को बैठा देता है और य से कह देता है कि यदि य भवन के बाहर जाने का प्रयत्न करेगा, तो वे य को गोली मार देंगे । क ने य का सदोष परिरोध किया है ।
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