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भारतीय दंड संहिता, 1860

भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 16/365 / 570

330संस्वीकृति उद्दापित करने या विवश करके संपत्ति का प्रत्यावर्तन कराने के लिए स्वेच्छया उपहति कारित करना

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 62स्रोत

यह धारा बदल दी गई है

भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू

1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।

जो कोई इस प्रयोजन से स्वेच्छया उपहति कारित करेगा कि उपहत व्यक्ति से या उससे हितबद्ध किसी व्यक्ति से कोई संस्वीकृति या कोई जानकारी, जिससे किसी अपराध अथवा अवचार का पता चल सके, उद्दापित की जाए अथवा उपहत व्यक्ति या उससे हितबद्ध व्यक्ति को मजबूर किया जाए कि वह कोई सम्पत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति प्रत्यावर्तित करे, या करवाए, या किसी दावे या मांग की पुष्टि, या ऐसी जानकारी दे, जिससे किसी सम्पत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति का प्रत्यावर्तन कराया जा सके, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।

दृष्टांत

(क) क, एक पुलिस आफिसर, य को यह संस्वीकृति करने को कि उसने अपराध किया है उत्प्रेरित करने के लिए यातना देता है। क इस धारा के अधीन अपराध का दोषी है ।

(ख) क, एक पुलिस आफिसर, यह बतलाने को कि अमुक चुराई हुई सम्पत्ति कहां रखी है उत्प्रेरित करने के लिए ख को यातना देता है । क इस धारा के अधीन अपराध का दोषी है ।

(ग) क, एक राजस्व आफिसर, राजस्व की वह बकाया, जो य द्वारा शोध्य है, देने को य को विवश करने के लिए उसे यातना देता है । क इस धारा के अधीन अपराध का दोषी है ।

(घ) क, एक जमींदार, भाटक देने को विवश करने के लिए अपनी एक रैयत को यातना देता है । क इस धारा के अधीन अपराध का दोषी है ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।