भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 16/347 / 570
314गर्भपात कारित करने के आशय से किए गए कार्यों द्वारा कारित मृत्यु
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 59स्रोत
यह धारा बदल दी गई है
भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू
1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।
जो कोई गर्भवती स्त्री का गर्भपात कारित करने के आशय से कोई ऐसा कार्य करेगा, जिससे स्त्री की मृत्यु कारित हो जाए, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।
यदि वह कार्य स्त्री की सम्मति के बिना किया जाए—और यदि वह कार्य उस स्त्री की सम्मति के बिना किया जाए, तो वह [आजीवन कारावास] से, या ऊपर बताए हुए दण्ड से, दण्डित किया जाएगा ।
स्पष्टीकरण—इस अपराध के लिए यह आवश्यक नहीं है कि अपराधी जानता हो कि उस कार्य से मृत्यु कारित करना संभाव्य है ।
संशोधन टिप्पणियां
- 1955 के अधिनियम सं० 26 की धारा 117 और अनुसूची द्वारा “आजीवन निर्वासन” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।