भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 16/353 / 570
320घोर उपहति
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यह धारा बदल दी गई है
भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू
1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।
उपहति की केवल नीचे लिखी किसमें “घोर” कहलाती हैं—
पहला—पुंस्त्वहरण ।
दूसरा—दोनों में से किसी भी नेत्र की दृष्टि का स्थायी विच्छेद ।
तीसरा—दोनों में से किसी भी कान की श्रवणशक्ति का स्थायी विच्छेद ।
चौथा—किसी भी अंग या जोड़ का विच्छेद ।
पांचवां—किसी भी अंग या जोड़ की शक्तियों का नाश या स्थायी ह्रास ।
छठा—सिर या चेहरे का स्थायी विद्रूपिकरण ।
सातवां—अस्थि या दांत का भंग या विसंधान ।
आठवां—कोई उपहति जो जीवन का संकटापन्न करती है या जिसके कारण उपहत व्यक्ति बीस दिन तक तीव्र शारीरिक पीड़ा में रहता है या अपने मामूली कामकाज को करने के लिए असमर्थ रहता है ।
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