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भारतीय दंड संहिता, 1860

भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 16/417 / 570

373वेश्यावृत्ति आदि के प्रयोजन के लिए अप्राप्तवय का खरीदना

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 71स्रोत

यह धारा बदल दी गई है

भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू

1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।

जो कोई [अठारह वर्ष के कम आयु के किसी व्यक्ति को इस आशय से कि ऐसा व्यक्ति किसी आयु में भी वेश्यावृत्ति या किसी व्यक्ति से अयुक्त संभोग करने के लिए या किसी विधिविरुद्ध और दुराचारिक प्रयोजन के लिए काम में लाया या उपयोग किया जाए या यह सम्भाव्य जानते हुए कि ऐसा व्यक्ति, किसी आयु में भी] ऐसे किसी प्रयोजन के लिए काम में लाया जाएगा या उपयोग किया जाएगा, खरीदेगा, भाड़े पर लेगा, या अन्यथा उसका कब्जा अभिप्राप्त करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।

[स्पष्टीकरण —अठारह 1 वर्ष से कम आयु की नारी को खरीदने वाली, भाड़े पर लेने वाली या अन्यथा उसका कब्जा अभिप्राप्त करने वाली किसी वेश्या के या वेश्यागृह चलाने या उसका प्रबन्ध करने वाले किसी व्यक्ति के बारे में, जब तक कि तत्प्रतिकूल साबित न कर दिया जाए, यह उपधारणा की जाएगी कि ऐसी नारी का कब्जा उसने इस आशय से अभिप्राप्त किया है कि वह वेश्यावृत्ति के प्रयोजनों के लिए उपयोग में लाई जाएगी ।]

[स्पष्टीकरण 2—“अयुक्त संभोग” का वही अर्थ है, जो धारा 372 में है ।]

संशोधन टिप्पणियां

  1. 1924 के अधिनियम सं० 18 की धारा 2 द्वारा कतिपय शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
  2. 1924 के अधिनियम सं० 18 की धारा 4 द्वारा अंतःस्थापित ।

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