भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 16/386 / 570
351हमला
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यह धारा बदल दी गई है
भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू
1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।
जो कोई, कोई अंगविक्षेप या कोई तैयारी इस आशय से करता है, या यह सम्भाव्य जानते हुए करता है कि ऐसे अंगविक्षेप या ऐसी तैयारी करने से किसी उपस्थित व्यक्ति को यह आशंका हो जाएगी कि जो वैसा अंगविक्षेप या तैयारी करता है, वह उस व्यक्ति पर आपराधिक बल का प्रयोग करने ही वाला है, वह हमला करता है, यह कहा जाता है ।
स्पष्टीकरण—केवल शब्द हमले की कोटि में नहीं आते । किन्तु जो शब्द कोई व्यक्ति प्रयोग करता है, वे उसके अंगविक्षेप या तैयारियों को ऐसा अर्थ दे सकते हैं जिससे वे अंगविक्षेप या तैयारियां हमले की कोटि में आ जाएं ।
दृष्टांत
(क) य पर अपना मुक्का क इस आशय से या यह सम्भाव्य जानते हुए हिलाता है कि उसके द्वारा य को यह विश्वास हो जाए कि क, य को मारने वाला ही है । क ने हमला किया है ।
(ख) क एक हिंस्त्र कुत्ते की मुखबन्धनी इस आशय से या यह सम्भाव्य जानते हुए खोलना आरंभ करता है कि उसके द्वारा य को यह विश्वास हो जाए कि वह य पर कुत्ते से आक्रमण कराने वाला है । क ने य पर हमला किया है ।
(ग) य से यह कहते हुए कि “मैं तुम्हें पीटूंगा” क एक छड़ी उठा लेता है । यहां यद्यपि क द्वारा प्रयोग में लाए गए शब्द किसी अवस्था में हमले की कोटि में नहीं आते और यद्यपि केवल अंगविक्षेप बनाना जिसके साथ अन्य परिस्थितियों का अभाव है, हमले की कोटि में न भी आए तथापि शब्दों द्वारा स्पष्टीकृत वह अंगविक्षेप हमले की कोटि में आ सकता है ।
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