भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 16/413 / 570
370व्यक्ति का दुर्व्यापार
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 69–70स्रोत
यह धारा बदल दी गई है
भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू
1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।
(1) जो कोई, शोषण के प्रयोजन के लिए,—
पहला—धमकियों का प्रयोग करके ; या
दूसरा—बल या किसी भी अन्य प्रकार के प्रपीड़न का प्रयोग करके ; या
तीसरा—अपहरण द्वारा ; या
चौथा—कपट का प्रयोग करके या प्रवंचना द्वारा ; या
पांचवां—शक्ति का दुरुपयोग करके ; या
छठवां—उत्प्रेरणा द्वारा, जिसके अंतर्गत ऐसे किसी व्यक्ति की, जो भर्ती किए गए, परिवहनित, संश्रित, स्थानांतरित या गृहीत व्यक्ति पर नियंत्रण रखता है, सम्मति प्राप्त करने के लिए भुगतान या फायदे देना या प्राप्त करना भी आता है,
किसी व्यक्ति या किन्हीं व्यक्तियों को (क) भर्ती करता है, (ख) परिवहनित करता है, (ग) संश्रय देता है, (घ) स्थानांतरित करता है, या (ङ) गृहीत करता है, वह दुर्व्यापार का अपराध करता है।
स्पष्टीकरण 1 —“शोषण” पद के अंतर्गत शारीरिक शोषण का कोई कृत्य या किसी प्रकार का लैंगिक शोषण, दासता या दासता अधिसेविता के समान व्यवहार या अंगों का बलात् अपसारण भी है।
स्पष्टीकरण 2—दुर्व्यापार के अपराध के अवधारण में पीड़ित की सम्मति महत्वहीन है ।
(2) जो कोई दुर्व्यापार का अपराध करेगा वह कठोर कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष से कम की नहीं होगी किंतु जो दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा ।
(3) जहां अपराध में एक से अधिक व्यक्तियों का दुर्व्यापार अंतर्वलित है, वहां वह कठोर कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष से कम की नहीं होगी किंतु जो आजीवन कारावास तक की हो सकेगी, दंडित होगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा ।
(4) जहां अपराध में किसी अवयस्क का दुर्व्यापार अंतर्वलित है, वहां वह कठोर कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष से कम की नहीं होगी किंतु जो आजीवन कारावास तक की हो सकेगी, दंडित होगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा ।
(5) जहां अपराध में एक से अधिक अवयस्कों का दुर्व्यापार अंतर्वलित है, वहां वह कठोर कारावास से, जिसकी अवधि चौदह वर्ष से कम की नहीं होगी किंतु जो आजीवन कारावास तक की हो सकेगी, दंडनीय होगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा ।
(6) यदि किसी व्यक्ति को अवयस्क का एक से अधिक अवसरों पर दुर्व्यापार किए जाने के अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराया जाता है तो ऐसा व्यक्ति आजीवन कारावास से, जिससे उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए कारावास अभिप्रेत होगा, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा ।
(7) जहां कोई लोक सेवक या कोई पुलिस अधिकारी किसी व्यक्ति के दुर्व्यापार में अंतर्वलित है, वहां ऐसा लोक सेवक या पुलिस अधिकारी आजीवन कारावास से, जिससे उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए कारावास अभिप्रेत होगा, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा ।
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- 2013 के अधिनियम सं० 13 की धारा 8 द्वारा प्रतिस्थापित ।
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