भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 16/370 / 570
335प्रकोपन पर स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना
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यह धारा बदल दी गई है
भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू
1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।
जो कोई गम्भीर और अचानक प्रकोपन पर [स्वेच्छया] घोर उपहति कारित करेगा, यदि न तो उसका आशय उस व्यक्ति से भिन्न, जिसने प्रकोपन दिया था, किसी व्यक्ति को घोर उपहति कारित करने का हो और न वह अपने द्वारा ऐसी उपहति कारित किया जाना सम्भाव्य जानता हो, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि चार वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दो हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
स्पष्टीकरण—अन्तिम दो धाराएं उन्हीं परंतुकों के अध्यधीन हैं, जिनके अध्यधीन धारा 300 का अपवाद 1 है।
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- 1882 के अधिनियम सं० 8 की धारा 8 द्वारा अंतःस्थापित ।
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