भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023/अध्याय 2/13 / 170
13कार्य आकस्मिक या साशय था इस प्रश्न पर प्रकाश डालने वाले तथ्य
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 485–486स्रोत
पुराना कानून
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872
आईईए से मिलान जल्दजब प्रश्न यह है कि कार्य आकस्मिक या साशय था, या किसी विशिष्ट ज्ञान या आशय से किया गया था, तब यह तथ्य कि ऐसा कार्य समरूप घटनाओं की आवली का भाग था जिनमें से प्रत्येक घटना के साथ वह कार्य करने वाला व्यक्ति संबद्ध था, सुसंगत है ।
दृष्टांत
(क) क पर यह अभियोग है कि अपने घर के बीमे का धन अभिप्राप्त करने के लिए उसने उसे जला दिया । ये तथ्य कि क कई घरों में एक के पश्चात् दूसरे में रहा, जिनमें से प्रत्येक का उसने बीमा कराया, जिनमें से प्रत्येक में आग लगी और जिन अग्निकांडों में से प्रत्येक के उपरान्त क को किसी भिन्न बीमा कंपनी से बीमा धन मिला, इस नाते सुसंगत है कि उनसे यह दर्शित होता है कि वे अग्निकांड आकस्मिक नहीं थे ।
(ख) ख के ऋणियों से धन प्राप्त करने के लिए क नियोजित है । क का यह कर्तव्य है कि बही में अपने द्वारा प्राप्त रकमों को दर्शित करने वाली प्रविष्टियां करे । वह एक प्रविष्टि करता है जिससे यह दर्शित होता है कि किसी विशिष्ट अवसर पर उसे वास्तव में प्राप्त राशि से कम रकम प्राप्त हुई । प्रश्न यह है कि क्या यह मिथ्या प्रविष्टि आकस्मिक थी या साशय । ये तथ्य कि उसी बही में क द्वारा की हुई अन्य प्रविष्टियां मिथ्या हैं और कि प्रत्येक अवस्था में मिथ्या प्रविष्टि क के पक्ष में है, सुसंगत है ।
(ग) ख को कपटपूर्वक कूटकृत करेंसी का परिदान करने का क अभियुक्त है । प्रश्न यह है कि क्या करेंसी का परिदान आकस्मिक था । यह तथ्य कि ख को परिदान के तुरन्त पहले या तुरन्त पश्चात् क ने ग, घ और ड को कूटकृत करेंसी का परिदान किया था इस नाते सुसंगत हैं कि उनसे यह दर्शित होता है कि ख को किया गया परिदान आकस्मिक नहीं था ।
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