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भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023/अध्याय 2/35 / 170

35संप्रमाण, आदि विषयक अधिकारिता के कतिपय निर्णयों की सुसंगति

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 493–494स्रोत

पुराना कानून

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872

आईईए से मिलान जल्द

(1) किसी सक्षम न्यायालय या अधिकरण के संप्रमाण-विषयक, विवाह-विषयक, नावधिकरण-विषयक या दिवाला-विषयक अधिकारिता के प्रयोग में दिया हुआ अन्तिम निर्णय, आदेश या डिक्री, जो किसी व्यक्ति को, कोई विधिक हैसियत प्रदान करती है या उससे ले लेती है या जो पूर्ण रूप से न कि किसी विनिर्दिष्ट व्यक्ति के विरुद्ध किसी व्यक्ति को ऐसी किसी हैसियत का हकदार या किसी विनिर्दिष्ट चीज का हकदार घोषित करती है, तब सुसंगत है जब किसी ऐसी विधिक हैसियत, या किसी ऐसी चीज पर किसी ऐसे व्यक्ति के हक का अस्तित्व सुसंगत है ।

(2) ऐसा निर्णय, आदेश या डिक्री इस बात का निश्चायक सबूत है कि—

(i) कोई विधिक हैसियत, जो वह प्रदत्त करती है, उस समय प्रोद्भूत हुई जब ऐसा निर्णय, आदेश या डिक्री प्रवर्तन में आई ;

(ii) कोई विधिक हैसियत, जिसके लिए वह किसी व्यक्ति को हकदार घोषित करती है, उस व्यक्ति को उस समय प्रोद्भूत हुई जब ऐसे निर्णय, आदेश या डिक्री द्वारा घोषित है कि उस समय यह उस व्यक्ति को प्रोद्भूत हुई ;

(iii) कोई विधिक हैसियत, जिसे वह किसी ऐसे व्यक्ति से ले लेती है उस समय खत्म हुई जिस समय ऐसे निर्णय, आदेश या डिक्री द्वारा घोषित है कि उस समय से वह हैसियत खत्म हो गई थी या खत्म हो जानी चाहिए थी ; और

(iv) कोई चीज जिसके लिए वह किसी व्यक्ति को ऐसा हकदार घोषित करती है उस व्यक्ति की उस समय सम्पत्ति थी जो उस समय ऐसे निर्णय, आदेश या डिक्री द्वारा घोषित है कि उस समय से वह चीज उसकी सम्पत्ति थी या होनी चाहिए थी ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।