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भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023/अध्याय 2/19 / 170

19स्वीकृतियों का उन्हें करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध और उनके द्वारा या उनकी ओर से साबित किया जाना

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 487–488स्रोत

पुराना कानून

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872

आईईए से मिलान जल्द

स्वीकृतियां, उन्हें करने वाले व्यक्ति के या उसके हित प्रतिनिधि के विरुद्ध सुसंगत हैं और साबित की जा सकेंगी, किन्तु उन्हें करने वाले व्यक्ति द्वारा या उसकी ओर से या उसके हित प्रतिनिधि द्वारा, निम्नलिखित अवस्थाओं में के सिवाय, वे साबित नहीं की जा सकेंगी, अर्थात् :—

(1) कोई स्वीकृति उसे करने वाले व्यक्ति द्वारा या उसकी ओर से तब साबित की जा सकेगी, जब वह इस प्रकृति की है कि यदि उसे करने वाला व्यक्ति मर गया होता, तो वह अन्य व्यक्तियों के बीच धारा 26 के अधीन सुसंगत होती ।

(2) कोई स्वीकृति उसे करने वाले व्यक्ति द्वारा या उसकी ओर से तब साबित की जा सकेगी, जब वह मन या शरीर की सुसंगत या विवाद्य किसी दशा के अस्तित्व का ऐसा कथन है जो उस समय या उसके लगभग किया गया था जब मन या शरीर की ऐसी दशा विद्यमान थी और ऐसे आचरण के साथ है जो उसकी असत्यता को अनधिसम्भाव्य कर देता है ।

(3) कोई स्वीकृति उसे करने वाले व्यक्ति द्वारा या उसकी ओर से साबित की जा सकेगी, यदि वह स्वीकृति के रूप में नहीं किन्तु अन्यथा सुसंगत है ।

दृष्टांत

(क) क और ख के बीच प्रश्न यह है कि अमुक विलेख कूटरचित है या नहीं । क अभिपुष्ट करता है कि वह असली है, ख अभिपुष्ट करता है कि वह कूटरचित है । ख का कोई कथन कि विलेख असली है, क साबित कर सकेगा तथा क का कोई कथन कि विलेख कूटरचित है, ख साबित कर सकेगा, किन्तु क अपना यह कथन कि विलेख असली है, साबित नहीं कर सकेगा और न ख ही अपना यह कथन कि विलेख कूटरचित है, साबित कर सकेगा ।

(ख) किसी पोत के कप्तान क का विचारण, उस पोत को संत्यक्त करने के लिए किया जाता है । यह दर्शित करने के लिए साक्ष्य दिया जाता है कि पोत अपने उचित मार्ग से बाहर ले जाया गया था । क अपने कारबार के साधारण अनुक्रम में अपने द्वारा रखी जाने वाली वह पुस्तक प्रस्तुत करता है जिसमें वे टिप्पणियां दर्शित हैं, जिनके बारे में यह अभिकथित है कि वे दिन-प्रतिदिन किए गए थे और जिनसे यह उपदर्शित है कि पोत अपने उचित मार्ग से बाहर नहीं ले जाया गया था । क इन कथनों को साबित कर सकेगा क्योंकि, यदि उसकी मृत्यु हो गई होती तो वे कथन अन्य व्यक्तियों के बीच धारा 26 के खंड (ख) के अधीन ग्राह्य होते ।

(ग) क कोलकाता में किए गए अपराध का अभियुक्त है । वह अपने द्वारा लिखित और उसी दिन चेन्नई में दिनांकित और उसी दिन का चेन्नई का डाक चिह्न धारण करने वाला एक पत्र प्रस्तुत करता है । पत्र की तारीख में, का कथन ग्राह्य है क्योंकि, यदि क की मृत्यु हो गई होती, तो वह धारा 26 के खंड (ख) के अधीन ग्राह्य होता ।

(घ) क चुराए हुए माल को यह जानते हुए कि वह चुराया हुआ है प्राप्त करने का अभियुक्त है । वह यह साबित करने की प्रस्थापना करता है कि उसने उसे उसके मूल्य से कम दाम में बेचने से इंकार किया था । क इन कथनों को साबित कर सकेगा, यद्यपि ये स्वीकृतियां हैं क्योंकि ये विवाद्यक तथ्यों से प्रभावित उसके आचरण के स्पष्टीकारक हैं ।

(ङ) क अपने कब्जे में कूटकृत मुद्रा, कपटपूर्वक रखने का अभियुक्त है, जिसका कूटकृत होना वह जानता था । वह यह साबित करने की प्रस्थापना करता है कि उसने एक कुशल व्यक्ति से उस मुद्रा की जांच करने को कहा था, क्योंकि उसे इस बात का संदेह था कि वह कूटकृत है या नहीं और उस व्यक्ति ने उसकी जांच की तथा उससे कहा कि वह असली है । क इन तथ्यों को साबित कर सकेगा ।

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