भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023/अध्याय 2/22 / 170
22उत्प्रेरणा, धमकी, प्रपीड़न या वचन द्वारा कराई गई संस्वीकृति, दाण्डिक कार्यवाही में कब विसंगत होती है
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 488–489स्रोत
पुराना कानून
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872
आईईए से मिलान जल्दअभियुक्त व्यक्ति द्वारा की गई संस्वीकृति दाण्डिक कार्यवाही में विसंगत होती है, यदि उसके किए जाने के बारे में न्यायालय को प्रतीत होता है कि अभियुक्त व्यक्ति के विरुद्ध आरोप के बारे में वह ऐसी उत्प्रेरणा, धमकी, प्रपीड़न या वचन द्वारा कराई गई है जो प्राधिकारवान् व्यक्ति की ओर से दिया गया है और जो न्यायालय की राय में इसके लिए पर्याप्त है कि वह अभियुक्त व्यक्ति को यह अनुमान करने के लिए उसे युक्तियुक्त प्रतीत होने वाले आधार देती है कि उसके करने से वह अपने विरुद्ध कार्यवाहियों के बारे में लौकिक रूप का कोई फायदा उठाएगा या किसी बुराई का परिवर्जन कर लेगा :
परंतु यदि संस्वीकृति ऐसी किसी उत्प्रेरणा, धमकी, प्रपीड़न या वचन से कारित प्रभाव के पूर्णतः दूर हो जाने के पश्चात् की गई है, तो वह सुसंगत है :
परंतु यह और कि यदि ऐसी संस्वीकृति अन्यथा सुसंगत है, तो वह केवल इसलिए विसंगत नहीं हो जाती कि वह गुप्त रखने के वचन के अधीन या उसे अभिप्राप्त करने के प्रयोजन के लिए अभियुक्त व्यक्ति से की गई प्रवंचना के परिणामस्वरूप, या उस समय जब कि वह मदोन्मत्त था, की गई थी या इसलिए कि वह ऐसे प्रश्नों के, चाहे उनका रूप कैसा ही क्यों न रहा हो, उत्तर में की गई थी जिनका उत्तर देना उसके लिए आवश्यक नहीं था, या केवल इसलिए कि उसे यह चेतावनी नहीं दी गई थी कि वह ऐसी संस्वीकृति करने के लिए आबद्ध नहीं था और उसके विरुद्ध उसका साक्ष्य दिया जा सकेगा ।
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