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भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023/अध्याय 2/27 / 170

27किसी साक्ष्य में कथित तथ्यों की सत्यता को पश्चात्वर्ती कार्यवाही में साबित करने के लिए उस साक्ष्य की सुसंगति

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 492स्रोत

पुराना कानून

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872

आईईए से मिलान जल्द

वह साक्ष्य, जो किसी साक्षी ने किसी न्यायिक कार्यवाही में, या विधि द्वारा उसे लेने के लिए प्राधिकृत किसी व्यक्ति के समक्ष दिया है, उन तथ्यों की सत्यता को, जो उस साक्ष्य में कथित है, किसी पश्चात्वर्ती न्यायिक कार्यवाही में या उसी न्यायिक कार्यवाही के आगामी प्रक्रम में साबित करने के प्रयोजन के लिए तब सुसंगत है, जब वह साक्षी मर गया है या मिल नहीं सकता है या वह साक्ष्य देने के लिए असमर्थ है या प्रतिपक्षी द्वारा उसे पहुंच के बाहर कर दिया गया है या यदि उसकी उपस्थिति इतने विलम्ब या व्यय के बिना, अभिप्राप्त नहीं की जा सकती, जितना कि मामले की परिस्थितियों में न्यायालय अयुक्तियुक्त समझता है :

परन्तु वह तब जब कि वह कार्यवाही उन्हीं पक्षकारों या उनके हित प्रतिनिधियों के बीच में थी, प्रथम कार्यवाही में प्रतिपक्षी को प्रतिपरीक्षा का अधिकार और अवसर था, तथा विवाद्य प्रश्न प्रथम कार्यवाही में सारतः वही थे, जो द्वितीय कार्यवाही में हैं ।

स्पष्टीकरण—दाण्डिक विचारण या जांच, इस धारा के अर्थ के अन्तर्गत अभियोजक और अभियुक्त के बीच की कार्यवाही समझी जाएगी ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।