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भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023/अध्याय 2/39 / 170

39विशेषज्ञों की रायें

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 495स्रोत

पुराना कानून

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872

आईईए से मिलान जल्द

(1) जब न्यायालय को, विदेशी विधि की या विज्ञान की या कला या किसी अन्य क्षेत्र की किसी बात पर या हस्तलेख या अंगुली-चिह्नों की पहचान के बारे में राय बनानी है तब उस बात पर ऐसी विदेशी विधि, विज्ञान या कला या किसी अन्य क्षेत्र में या हस्तलेख या अंगुली-चिह्नों की पहचान विषयक प्रश्नों में, विशेष कुशल व्यक्तियों की रायें सुसंगत तथ्य हैं और ऐसे व्यक्तियों को विशेषज्ञ कहा जाता हैं ।

दृष्टांत

(क) प्रश्न यह है कि क्या क की मृत्यु विष द्वारा कारित हुई । जिस विष के बारे में यह अनुमान है कि उससे क की मृत्यु हुई है, उस विष से पैदा हुए लक्षणों के बारे में विशेषज्ञों की रायें सुसंगत हैं ।

(ख) प्रश्न यह है कि क्या क अमुक कार्य करने के समय चित्त-विकृति के कारण उस कार्य की प्रकृति, या यह कि जो कुछ वह कर रहा है वह या तो दोषपूर्ण या विधि के प्रतिकूल है, जानने में असमर्थ था । इस प्रश्न पर विशेषज्ञों की रायें सुसंगत हैं कि क्या क द्वारा प्रदर्शित लक्षणों से चित्त-विकृति सामान्यतः दर्शित होती है और क्या ऐसी चित्त-विकृति व्यक्तियों को उन कार्यों की प्रकृति, जिन्हें वे करते हैं, या वह कि जो कुछ वे करते हैं वह या तो दोषपूर्ण या विधि के प्रतिकूल हैं, जानने में प्रायः असमर्थ बना देती है ।

(ग) प्रश्न यह है कि क्या अमुक दस्तावेज क द्वारा लिखा गया था । एक अन्य दस्तावेज प्रस्तुत किया जाता है जिसका क द्वारा लिखा जाना साबित या स्वीकृत है । इस प्रश्न पर विशेषज्ञों की रायें सुसंगत हैं कि क्या दोनों दस्तावेज एक ही व्यक्ति द्वारा या विभिन्न व्यक्तियों द्वारा लिखे गए थे ।

(2) जब न्यायालय को किसी कार्यवाही में किसी कंप्यूटर संसाधन या किसी अन्य इलैक्ट्रानिक या डिजिटल रूप में पारेषित या संग्रहीत किसी सूचना के संबंध में कोई राय बनानी हो तब सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79क में निर्दिष्ट इलैक्ट्रानिक साक्ष्य के परीक्षक की राय एक सुसंगत तथ्य है ।

स्पष्टीकरण—इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, इलैक्ट्रानिक साक्ष्य का परीक्षक एक विशेषज्ञ होगा ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।