भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023/अध्याय 2/37 / 170
37धारा 34, धारा 35 और धारा 36 में वर्णित से भिन्न निर्णय, आदि कब सुसंगत हैं
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 494–495स्रोत
पुराना कानून
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872
आईईए से मिलान जल्दधारा 34, धारा 35 और धारा 36 में वर्णित से भिन्न निर्णय, आदेश या डिक्रियां विसंगत हैं जब तक कि ऐसे निर्णय, आदेश या डिक्री का अस्तित्व विवाद्यक तथ्य न हो या वह इस अधिनियम के किसी अन्य उपबन्ध के अन्तर्गत सुसंगत न हो ।
दृष्टांत
(क) क और ख किसी अपमान-लेख के लिए, जो उनमें से प्रत्येक पर लांछन लगाता है, ग पर पृथक्-पृथक् वाद लाते हैं । प्रत्येक मामले में ग कहता है कि वह बात, जिसका अपमान-लेखीय होना अभिकथित है, सत्य है और परिस्थितियां ऐसी हैं कि वह अधिसम्भाव्यतः या तो प्रत्येक मामले में सत्य है या किसी में नहीं । ग के विरुद्ध क इस आधार पर नुकसानी की डिक्री अभिप्राप्त करता है कि ग अपना न्यायोचित्य साबित करने में असफल रहा है । यह तथ्य ख और ग के बीच विसंगत है ।
(ख) ख का अभियोजन क इसलिए करता है कि उसने क की गाय चुराई है । ख दोषसिद्ध किया जाता है । तत्पश्चात् क उस गाय के लिए, ग पर वाद लाता है जिसे ख ने दोषसिद्धि होने से पूर्व ग को बेच दिया था । ख के विरुद्ध वह निर्णय क और ग के बीच विसंगत है ।
(ग) क ने ख के विरुद्ध भूमि के कब्जे की डिक्री अभिप्राप्त की है । ख का पुत्र ग परिणामस्वरूप क की हत्या करता है । उस निर्णय का अस्तित्व अपराध का हेतु दर्शित करने के नाते सुसंगत है ।
(घ) क पर चोरी और चोरी के लिए पहले से ही दोषसिद्धि का आरोप है । पूर्व दोषसिद्धि विवाद्यक तथ्य होने के नाते सुसंगत है ।
(ङ) ख की हत्या के लिए क विचारित किया जाता है । यह तथ्य कि ख ने क पर अपमान-लेख के लिए अभियोजन चलाया था और क दोषसिद्ध और दण्डित किया गया था, धारा 6 के अधीन विवाद्यक तथ्य का हेतु दर्शित करने के नाते सुसंगत है ।
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