भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023/अध्याय 2/8 / 170
8सामान्य परिकल्पना के बारे में षड्यंत्रकारी द्वारा कही गई या की गई बातें
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 482स्रोत
पुराना कानून
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872
आईईए से मिलान जल्दजहां यह विश्वास करने का युक्तियुक्त आधार है कि दो या अधिक व्यक्तियों ने कोई अपराध या वादयोग्य दोष करने के लिए मिलकर षड्यंत्र किया है, वहां उनके सामान्य आशय के बारे में उनमें से किसी एक व्यक्ति द्वारा उस समय के पश्चात्, जब ऐसा आशय उनमें से किसी एक ने प्रथम बार मन में धारण किया, कही गई, की गई, या लिखी गई कोई बात उन व्यक्तियों में से प्रत्येक व्यक्ति के विरुद्ध, जिनके बारे में विश्वास किया जाता है कि उन्होंने इस प्रकार षड्यंत्र किया है, षड्यंत्र का अस्तित्व साबित करने के प्रयोजन के लिए उसी प्रकार सुसंगत तथ्य है जिस प्रकार यह दर्शित करने के प्रयोजन के लिए कि ऐसा कोई व्यक्ति उसका पक्षकार था ।
दृष्टांत
यह विश्वास करने का युक्तियुक्त आधार है कि क राज्य के विरुद्ध युद्ध करने के षड्यंत्र में सम्मिलित हुआ है ।
ख ने उस षड्यंत्र के प्रयोजन के लिए यूरोप में आयुध उपाप्त किए, ग ने वैसे ही उद्देश्य से कोलकाता में धन संग्रह किया, घ ने मुम्बई में लोगों को उस षड्यंत्र में सम्मिलित होने के लिए प्रेरित किया, ड ने आगरा में उस उद्देश्य के पक्षपोषण में लेख प्रकाशित किए और ग द्वारा कोलकाता में संग्रहित धन को च ने दिल्ली से छ के पास सिंगापुर भेजा । इन तथ्यों और उस षड्यंत्र का वृत्तान्त देने वाले ज द्वारा लिखित पत्र की अन्तर्वस्तु में से प्रत्येक षड्यंत्र का अस्तित्व साबित करने के लिए और उसमें क की सह-अपराधिता साबित करने के लिए भी सुसंगत है, चाहे वह उन सभी के बारे में अनभिज्ञ रहा हो, तथा चाहे उन्हें करने वाले व्यक्ति उसके लिए अपरिचित रहे हों, तथा चाहे वे उसके षड्यंत्र में सम्मिलित होने से पूर्व या उसके षड्यंत्र से अलग हो जाने के पश्चात् घटित हुए हों ।
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