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भारतीय न्याय संहिता, 2023

भारतीय न्याय संहिता, 2023/अध्याय 5/68 / 358

68प्राधिकार में किसी व्यक्ति द्वारा मैथुन

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 43स्रोत

पुराना कानून

भारतीय दंड संहिता, 1860

आईपीसी से मिलान जल्द

जो कोई,—

(क) प्राधिकार की किसी स्थिति में या किसी वैश्वासिक संबंध में रखते हुए ; या

(ख) लोक सेवक होते हुए ; या

(ग) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि द्वारा या उसके अधीन स्थापित किसी कारागार, प्रतिप्रेषणगृह या अभिरक्षा के अन्य स्थान का या महिलाओं या शिशुओं की किसी संस्था का अधीक्षक या प्रबंधक होते हुए ; या

(घ) अस्पताल के प्रबंधतंत्र या किसी अस्पताल का कर्मचारिवृंद होते हुए,

ऐसी किसी महिला को, जो या तो उसकी अभिरक्षा में है या उसके भारसाधन के अधीन है या परिसर में उपस्थित है, अपने साथ मैथुन करने हेतु, जो बलात्संग के अपराध की कोटि में नहीं आता है, उत्प्रेरित या विलुब्ध करने के लिए ऐसी स्थिति या वैश्वासिक संबंध का दुरुपयोग करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कठिन कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष से कम की नहीं होगी, किन्तु जो दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।

स्पष्टीकरण —इस धारा में, “मैथुन” से धारा 63 के खंड (क) से खंड (घ) में वर्णित कोई भी कृत्य अभिप्रेत होगा ।

स्पष्टीकरण 2—इस धारा के प्रयोजनों के लिए, धारा 63 का स्पष्टीकरण । भी लागू होगा ।

स्पष्टीकरण 3—किसी कारागार, प्रतिप्रेषणगृह या अभिरक्षा के अन्य स्थान या महिलाओं या शिशुओं की किसी संस्था के संबंध में, “अधीक्षक” के अंतर्गत कोई ऐसा व्यक्ति आता है, जो ऐसे कारागार, प्रतिप्रेषणगृह, स्थान या संस्था में ऐसा कोई पद धारण करता है, जिसके आधार पर वह उसके अंतःवासियों पर किसी प्राधिकार या नियंत्रण का प्रयोग कर सकता है ।

स्पष्टीकरण 4—“अस्पताल” और “महिलाओं या शिशुओं की संस्था” पदों का क्रमशः वही अर्थ होगा, जो धारा 64 की उपधारा (2) के स्पष्टीकरण के खंड (ख) और खंड (घ) में उनका है ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।