भारतीय न्याय संहिता, 2023/अध्याय 5/72 / 358
72कतिपय अपराधों, आदि से पीड़ित व्यक्ति की पहचान का प्रकटीकरण
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 44–45स्रोत
पुराना कानून
भारतीय दंड संहिता, 1860
आईपीसी से मिलान जल्द(1) जो कोई, किसी नाम या अन्य बात को, जिससे किसी ऐसे व्यक्ति की (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् पीड़ित व्यक्ति कहा गया है) पहचान हो सकती है, जिसके विरुद्ध धारा 64 या धारा 65 या धारा 66 या धारा 67 या धारा 68 या धारा 69 या धारा 70 या धारा 71 के अधीन किसी अपराध का किया जाना अभिकथित है या किया गया पाया गया है, मुद्रित या प्रकाशित करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, और जुर्माने का भी दायी होगा ।
(2) उपधारा (1) की किसी भी बात का विस्तार, किसी नाम या अन्य बात के मुद्रण या प्रकाशन पर, यदि उससे पीड़ित व्यक्ति की पहचान हो सकती है, तब नहीं होता है जब ऐसा मुद्रण या प्रकाशन—
(क) पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी के या ऐसे अपराध का अन्वेषण करने वाले पुलिस अधिकारी के, जो ऐसे अन्वेषण के प्रयोजन के लिए सद्भावपूर्वक कार्य करता है, द्वारा या उसके लिखित आदेश के अधीन किया जाता है ; या
(ख) पीड़ित व्यक्ति द्वारा या उसके लिखित प्राधिकार से किया जाता है ; या
(ग) जहां पीड़ित व्यक्ति की मृत्यु हो चुकी है या वह शिशु या विकृत चित्त है, वहां, पीड़ित व्यक्ति के निकट संबंधी द्वारा या उसके लिखित प्राधिकार से किया जाता है:
परन्तु निकट संबंधी द्वारा कोई भी ऐसा प्राधिकार, किसी मान्यताप्राप्त कल्याण संस्था या संगठन के अध्यक्ष या सचिव, चाहे उसका जो भी नाम हो, से भिन्न किसी अन्य व्यक्ति को नहीं दिया जाएगा ।
स्पष्टीकरण—इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, “मान्यताप्राप्त कल्याण संस्था या संगठन” से केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा इस संबंध में मान्यताप्राप्त कोई समाज कल्याण संस्था या संगठन अभिप्रेत है ।
यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।