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भारतीय न्याय संहिता, 2023

भारतीय न्याय संहिता, 2023/अध्याय 5/73 / 358

73अनुमति के बिना न्यायालय की कार्यवाहियों से संबंधित किसी मामले का मुद्रण या प्रकाशन करना

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 45स्रोत

पुराना कानून

भारतीय दंड संहिता, 1860

आईपीसी से मिलान जल्द

जो कोई, धारा 72 में निर्दिष्ट किसी अपराध की बाबत किसी न्यायालय के समक्ष किसी कार्यवाही के संबंध में, कोई बात उस न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना मुद्रित या प्रकाशित करता है, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, और जुर्माने का भी दायी होगा ।

स्पष्टीकरण—किसी उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय के निर्णय का मुद्रण या प्रकाशन, इस धारा के अर्थ के अंतर्गत अपराध की कोटि में नहीं आता है ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।