भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023/अध्याय 5/57 / 170
57प्राथमिक साक्ष्य
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 500स्रोत
पुराना कानून
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872
आईईए से मिलान जल्दप्राथमिक साक्ष्य से न्यायालय के निरीक्षण के लिए प्रस्तुत किया गया दस्तावेज स्वयं अभिप्रेत है ।
स्पष्टीकरण 1—जहां कोई दस्तावेज कई मूल प्रतियों में निष्पादित है वहां प्रत्येक मूल प्रति उस दस्तावेज का प्राथमिक साक्ष्य है ।
स्पष्टीकरण 2—जहां कोई दस्तावेज प्रतिलेख में निष्पादित है और प्रत्येक प्रतिलेख पक्षकारों में से केवल एक पक्षकार या कुछ पक्षकारों द्वारा निष्पादित किया गया है, वहां प्रत्येक प्रतिलेख उन पक्षकारों के विरुद्ध, जिन्होंने उसका निष्पादन किया है, प्राथमिक साक्ष्य है ।
स्पष्टीकरण 3—जहां अनेक दस्तावेज एकरूपात्मक प्रक्रिया द्वारा बनाए गए हैं जैसा कि मुद्रण, शिला मुद्रण या फोटो चित्रण में होता है, वहां उनमें से प्रत्येक शेष सबकी अन्तर्वस्तु का प्राथमिक साक्ष्य है, किन्तु जहां वे सब किसी एक ही मूल की प्रतियां हैं वहां वे मूल की अन्तर्वस्तु का प्राथमिक साक्ष्य नहीं हैं ।
स्पष्टीकरण 4—जहां कोई इलैक्ट्रानिक या डिजिटल अभिलेख सृजित या संग्रहित किया जाता है और ऐसा संग्रह एक साथ या पश्चात्वर्ती रूप से अनेक फाइलों में किया जाता है, उनमें से प्रत्येक फाइल प्राथमिक साक्ष्य है ।
स्पष्टीकरण 5—जहां कोई इलैक्ट्रानिक या डिजिटल अभिलेख समुचित अभिरक्षा में प्रस्तुत किया जाता है, ऐसा इलैक्ट्रानिक और डिजिटल अभिलेख प्राथमिक साक्ष्य है, जब तक कि वह विवादग्रस्त नहीं है ।
स्पष्टीकरण 6—जहां किसी वीडियो रिकार्डिंग को इलैक्ट्रानिक प्ररूप में एक साथ संग्रहित किया जाता है और किसी अन्य व्यक्ति को पारेषित या प्रसारित या अंतरित किया जाता है तो प्रत्येक संग्रहित रिकार्डिंग प्राथमिक साक्ष्य है ।
स्पष्टीकरण 7—जहां किसी इलैक्ट्रानिक या डिजिटल अभिलेख को किसी कंप्यूटर संसाधन में एक से अधिक संग्रहण स्थान में संग्रहित किया जाता है, ऐसा प्रत्येक स्वचालित संग्रहण, जिसके अंतर्गत अस्थायी फाइलें भी हैं, प्राथमिक साक्ष्य हैं ।
दृष्टांत
यह दर्शित किया जाता है कि एक ही समय एक ही मूल से मुद्रित अनेक प्लेकार्ड किसी व्यक्ति के कब्जे में रखे हैं । इन प्लेकार्डों में से कोई भी एक अन्य किसी की भी अन्तर्वस्तु का प्राथमिक साक्ष्य है किन्तु उनमें से कोई भी मूल की अन्तर्वस्तु का प्राथमिक साक्ष्य नहीं है ।
यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।