भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023/अध्याय 5/60 / 170
60वे दशाएं, जिनमें दस्तावेजों के संबंध में द्वितीयक साक्ष्य दिया जा सकेगा
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 501–502स्रोत
पुराना कानून
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872
आईईए से मिलान जल्दकिसी दस्तावेज के अस्तित्व, परिस्थिति या अन्तर्वस्तु का द्वितीयक साक्ष्य निम्नलिखित दशाओं में दिया जा सकेगा, अर्थात् :—
(क) जब यह दर्शित कर दिया जाता है या प्रतीत होता है कि मूल ऐसे व्यक्ति के कब्जे में है या उसके अधिकार में है—
(i) जिसके विरुद्ध उस दस्तावेज का साबित किया जाना वांछनीय है ;
या
(ii) जो न्यायालय की आदेशिका की पहुंच से बाहर है, या ऐसी आदेशिका के अधीन नहीं है ; या
(iii) जो उसे प्रस्तुत करने के लिए विधि द्वारा आबद्ध है,
और जब ऐसा व्यक्ति धारा 64 में वर्णित सूचना के पश्चात्, उसे प्रस्तुत नहीं करता है ;
(ख) जब मूल के अस्तित्व, परिस्थिति या अन्तर्वस्तु को उस व्यक्ति द्वारा, जिसके विरुद्ध उसे साबित किया जाना है या उसके हित प्रतिनिधि द्वारा लिखित रूप में स्वीकृत किया जाना साबित कर दिया गया है ;
(ग) जब मूल नष्ट हो गया है, या खो गया है, या जबकि उसकी अन्तर्वस्तु का साक्ष्य देने की प्रस्थापना करने वाला पक्षकार अपने स्वयं के व्यतिक्रम या उपेक्षा से उद्भूत न होने वाले अन्य किसी कारण से उसे युक्तियुक्त समय में प्रस्तुत नहीं कर सकता है ;
(घ) जब मूल इस प्रकृति का है कि उसे आसानी से स्थानान्तरित नहीं किया जा सकता है ;
(ङ) जब मूल धारा 74 के अर्थ के अन्तर्गत एक लोक दस्तावेज है ;
(च) जब मूल ऐसा दस्तावेज है जिसकी प्रमाणित प्रति का साक्ष्य में दिया जाना इस अधिनियम द्वारा या भारत में प्रवृत्त किसी अन्य विधि द्वारा अनुज्ञात है;
(छ) जब मूल ऐसे अनेक लेखाओं या अन्य दस्तावेजों से गठित है जिनकी न्यायालय में सुविधापूर्वक परीक्षा नहीं की जा सकती और वह तथ्य जिसे साबित किया जाना है, सम्पूर्ण संग्रह का साधारण परिणाम है ।
स्पष्टीकरण—(i) खंड (क), खंड (ग) और खंड (घ) के प्रयोजनों के लिए, दस्तावेज की अन्तर्वस्तु का कोई भी द्वितीयक साक्ष्य ग्राह्य है ;
(ii) खंड (ख) के प्रयोजनों के लिए लिखित स्वीकृति ग्राह्य है ;
(iii) खंड (ङ) या खंड (च) के प्रयोजनों के लिए, दस्तावेज की प्रमाणित प्रति ग्राह्य है, किन्तु अन्य किसी भी प्रकार का द्वितीयक साक्ष्य ग्राह्य नहीं है ;
(iv) खंड (छ) के प्रयोजनों के लिए, दस्तावेजों के साधारण परिणाम का साक्ष्य ऐसे किसी व्यक्ति द्वारा दिया जा सकेगा जिसने उनकी परीक्षा की है और जो ऐसे दस्तावेज की परीक्षा करने में कुशल है ।
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