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भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023/अध्याय 5/77 / 170

77अन्य शासकीय दस्तावेजों का सबूत

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 507स्रोत

पुराना कानून

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872

आईईए से मिलान जल्द

निम्नलिखित लोक दस्तावेज, निम्नलिखित रूप से साबित किए जा सकेंगे,—

(क) केन्द्रीय सरकार के किसी मंत्रालय और विभाग के, या किसी राज्य सरकार के, या किसी राज्य सरकार या संघ राज्यक्षेत्र प्रशासन के किसी विभाग के अधिनियम, आदेश या अधिसूचनाएं,—

(i) उन विभागों के अभिलेखों द्वारा, जो क्रमशः उन विभागों के प्रमुख द्वारा प्रमाणित हैं ; या

(ii) किसी दस्तावेज द्वारा, जिसका ऐसी किसी सरकार के आदेश द्वारा मुद्रित होना तात्पर्यित है ;

(ख) संसद् या किसी राज्य विधान मंडल की कार्यवाहियां, क्रमशः इन निकायों के जर्नलों द्वारा या प्रकाशित अधिनियमों या सारांशों द्वारा, या संबद्ध सरकार के आदेश द्वारा मुद्रित होना तात्पर्यित होने वाली प्रतियों द्वारा ;

(ग) भारत के राष्ट्रपति या किसी राज्य के राज्यपाल या संघ राज्यक्षेत्र के प्रशासक या उपराज्यपाल द्वारा निकाली गई उद्घोषणाएं, आदेश या विनियम, राजपत्र में अंतर्विष्ट प्रतियों या उद्धरणों द्वारा ;

(घ) किसी विदेश की कार्यपालिका के कार्य या विधान-मंडल की कार्यवाहियां, उनके प्राधिकार से प्रकाशित, या उस देश में सामान्यतः इस रूप में सामान्यतः प्राप्त, जर्नलों द्वारा, या उस देश या प्रभुत्वसंपन्न की मुद्रा के अधीन प्रमाणित प्रति द्वारा, या किसी केन्द्रीय अधिनियम में उनकी मान्यता द्वारा ;

(ङ) किसी राज्य के नगरपालिका या स्थानीय निकाय की कार्यवाहियां, ऐसी कार्यवाहियों की ऐसी प्रति द्वारा, जो उनके विधिक पालक द्वारा प्रमाणित है, या ऐसे निकाय के प्राधिकार से प्रकाशित हुई तात्पर्यित होने वाली किसी मुद्रित पुस्तक द्वारा ;

(च) किसी विदेश का किसी अन्य प्रकार का लोक दस्तावेज, जो मूल द्वारा या उसके विधिक पालक द्वारा प्रमाणित किसी प्रति द्वारा, जिस प्रति के साथ किसी नोटरी पब्लिक की, या भारतीय कौंसल या राजनयिक अभिकर्ता की मुद्रा के अधीन यह प्रमाणपत्र है कि वह प्रति मूल की विधिक अभिरक्षा रखने वाले अधिकारी द्वारा सम्यक् रूप से प्रमाणित है, तथा उस दस्तावेज की प्रकृति उस विदेश की विधि के अनुसार साबित किए जाने के द्वारा ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।