भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023/अध्याय 5/58 / 170
58द्वितीयक साक्ष्य
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 500–501स्रोत
पुराना कानून
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872
आईईए से मिलान जल्दद्वितीयक साक्ष्य के अन्तर्गत निम्नलिखित आते हैं—
(i) इसमें इसके पश्चात् अन्तर्विष्ट उपबन्धों के अधीन दी हुई प्रमाणित प्रतियां; ही) मूल से ऐसी यान्त्रिक प्रक्रियाओं द्वारा, जो प्रक्रियाएं स्वयं ही प्रति की शुद्धता सुनिश्चित करती हैं, बनाई गई प्रतियां और ऐसी प्रतियों से तुलना की हुई प्रतिलिपियां;
(iii) मूल से बनाई गई या तुलना की गई प्रतियां;
(iv) उन पक्षकारों के विरुद्ध, जिन्होंने उन्हें निष्पादित नहीं किया है, दस्तावेजों के प्रतिलेख;
(v) किसी दस्तावेज की अन्तर्वस्तु का उस व्यक्ति द्वारा, जिसने स्वयं उसे देखा है, दिया हुआ मौखिक वृत्तांत ;
(vi) मौखिक स्वीकृतियां ;
(vii) लिखित स्वीकृतियां ;
(viii) किसी ऐसे व्यक्ति का साक्ष्य, जिसने किसी दस्तावेज की जांच की है, जिसके मूल में अनेक लेखें या अन्य दस्तावेज अंतर्विष्ट हैं, जिनकी सुविधाजनक रूप से न्यायालय में जांच नहीं की जा सकती है और जो ऐसे दस्तावेजों की जांच करने में कुशल है ।
दृष्टांत
(क) किसी मूल का फोटोचित्र, यद्यपि दोनों की तुलना न की गई हो तथापि यदि यह साबित किया जाता है कि फोटोचित्रित वस्तु मूल थी, उस मूल की अन्तर्वस्तु का द्वितीयक साक्ष्य है ।
(ख) किसी पत्र की वह प्रति, जिसकी तुलना उस पत्र की, उस प्रति से कर ली गई है जो प्रतिलिपि यंत्र द्वारा तैयार की गई है, उस पत्र की अन्तर्वस्तु का द्वितीयक साक्ष्य है, यदि यह दर्शित कर दिया जाता है कि प्रतिलिपि यंत्र द्वारा तैयार की गई प्रति मूल से बनाई गई थी ।
(ग) किसी प्रति की नकल करके तैयार की गई किन्तु तत्पश्चात् मूल से तुलना की हुई प्रतिलिपि द्वितीयक साक्ष्य है ; किन्तु इस प्रकार तुलना नहीं की हुई प्रति मूल का द्वितीयक साक्ष्य नहीं है, यद्यपि उस प्रति की, जिससे वह नकल की गई है, मूल से तुलना की गई थी ।
(घ) न तो मूल से तुलना की हुई प्रति का मौखिक वृत्तान्त और न मूल के किसी फोटोचित्र या यंत्रकृत प्रति का मौखिक वृत्तान्त मूल का द्वितीयक साक्ष्य है ।
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