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भारतीय न्याय संहिता, 2023

भारतीय न्याय संहिता, 2023/अध्याय 14/228 / 358

228मिथ्या साक्ष्य गढ़ना

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 97–98स्रोत

पुराना कानून

भारतीय दंड संहिता, 1860

आईपीसी से मिलान जल्द

जो कोई, इस आशय से किसी परिस्थिति को अस्तित्व में लाता है, या किसी पुस्तक या अभिलेख या इलैक्ट्रानिक अभिलेख में कोई मिथ्या प्रविष्टि करता है, या मिथ्या कथन अंतर्विष्ट करने वाला कोई दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख रचता है कि ऐसी परिस्थिति, मिथ्या प्रविष्टि या मिथ्या कथन न्यायिक कार्यवाही में, या ऐसी किसी कार्यवाही में जो लोक सेवक के समक्ष उसके उस नाते या मध्यस्थ के समक्ष विधि द्वारा की जाती है, साक्ष्य में दर्शित हो और कि इस प्रकार साक्ष्य में दर्शित होने पर ऐसी परिस्थिति, मिथ्या प्रविष्टि या मिथ्या कथन के कारण कोई व्यक्ति जिसे ऐसी कार्यवाही में साक्ष्य के आधार पर राय कायम करनी है ऐसी कार्यवाही के परिणाम के लिए तात्विक किसी बात के संबंध में गलत राय बनाए, वह “मिथ्या साक्ष्य गढ़ता है”, यह कहा जाता है ।

दृष्टांत

(क) क एक बक्से में, जो य का है, इस आशय से आभूषण रखता है कि वे उस बक्से में पाए जाएं, और इस परिस्थिति से य चोरी के लिए दोषसिद्ध ठहराया जाए । क ने मिथ्या साक्ष्य गढ़ा है ।

(ख) क अपनी दुकान की बही में एक मिथ्या प्रविष्टि इस प्रयोजन से करता है कि वह न्यायालय में सम्पोषक साक्ष्य के रूप में काम में लाई जाए । क ने मिथ्या साक्ष्य गढ़ा है ।

(ग) य को एक आपराधिक षड्यंत्र के लिए दोषसिद्ध ठहराया जाने के आशय से क एक पत्र य के हस्तलेख की अनुकृति करके लिखता है, जिससे यह तात्पर्यित है कि य ने उसे ऐसे आपराधिक षड्यंत्र के सह-अपराधी को संबोधित किया है और उस पत्र को ऐसे स्थान पर रख देता है, जिसके संबंध में वह यह जानता है कि पुलिस अधिकारी संभाव्यतः उस स्थान की तलाशी लेंगे । क ने मिथ्या साक्ष्य गढ़ा है ।

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