भारतीय न्याय संहिता, 2023/अध्याय 14/248 / 358
248क्षति करने के आशय से अपराध का मिथ्या आरोप
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 103स्रोत
पुराना कानून
भारतीय दंड संहिता, 1860
आईपीसी से मिलान जल्दजो कोई, किसी व्यक्ति को यह जानते हुए कि उस व्यक्ति के विरुद्ध ऐसी कार्यवाही या आरोप के लिए कोई न्यायसंगत या विधिपूर्ण आधार नहीं है, क्षति कारित करने के आशय से उस व्यक्ति के विरुद्ध कोई दांडिक कार्यवाही संस्थित करता है या करवाता है या उस व्यक्ति पर मिथ्या आरोप लगाता है कि उसने अपराध किया है—
(क) वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या दो लाख रुपए तक के जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ;
(ख) यदि ऐसी दांडिक कार्यवाही मृत्यु, आजीवन कारावास या दस वर्ष या उससे अधिक के कारावास से दंडनीय अपराध के मिथ्या आरोप पर संस्थित की जाए, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
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