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भारतीय न्याय संहिता, 2023

भारतीय न्याय संहिता, 2023/अध्याय 14/238 / 358

238अपराध के साक्ष्य का विलोपन, या अपराधी को बचाने के लिए मिथ्या सूचना देना

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 100–101स्रोत

पुराना कानून

भारतीय दंड संहिता, 1860

आईपीसी से मिलान जल्द

जो कोई, यह जानते हुए या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए कि कोई अपराध किया गया है, उस अपराध के किए जाने के किसी साक्ष्य का विलोप, इस आशय से कारित करता है कि अपराधी को विधिक दंड से बचाया जा सके या उस आशय से उस अपराध से संबंधित कोई ऐसी सूचना देता है, जिसके मिथ्या होने का उसे ज्ञान या विश्वास है,”

(क) यदि वह अपराध जिसके किए जाने का उसे ज्ञान या विश्वास है, मृत्यु से दंडनीय हो, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ;

(ख) और यदि वह अपराध आजीवन कारावास से, या ऐसे कारावास से, जो दस वर्ष तक का हो सकेगा, दंडनीय हो, तो वह दोनों में से किसी भांति के, कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ;

(ग) यदि वह अपराध ऐसे कारावास से उतनी अवधि के लिए दंडनीय हो, जो दस वर्ष तक की न हो, तो वह उस अपराध के लिए उपबंधित भांति के कारावास से उतनी अवधि के लिए, जो उस अपराध के लिए उपबंधित कारावास की दीर्घतम अवधि की एक-चौथाई तक हो सकेगी या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा । दृष्टांत क यह जानते हुए कि ख ने य की हत्या की है, ख को दंड से बचाने के आशय से मृत

शरीर को छिपाने में ख की सहायता करता है । क दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष की हो सकेगी और जुर्माने से भी दंडनीय है ।

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