भारतीय न्याय संहिता, 2023/अध्याय 14/231 / 358
231आजीवन कारावास या कारावास से दंडनीय अपराध के लिए दोषसिद्धि कराने के आशय से मिथ्या साक्ष्य देना या गढ़ना
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 99स्रोत
पुराना कानून
भारतीय दंड संहिता, 1860
आईपीसी से मिलान जल्दजो कोई, इस आशय से या यह सम्भाव्य जानते हुए कि उसके द्वारा वह किसी व्यक्ति को ऐसे अपराध के लिए, जो भारत में तत्समय प्रवृत्त विधि द्वारा मृत्यु से दंडनीय न हो किन्तु आजीवन कारावास या सात वर्ष या उससे अधिक की अवधि के कारावास से दंडनीय हो, दोषसिद्ध करवाता है, मिथ्या साक्ष्य देता है या गढ़ता है, वह वैसे ही दंडित किया जाएगा जैसे वह व्यक्ति दंडनीय होता जो उस अपराध के लिए दोषसिद्ध होता ।
दृष्टांत
क न्यायालय के समक्ष इस आशय से मिथ्या साक्ष्य देता है कि उसके द्वारा य डकैती के लिए दोषसिद्ध किया जाए । डकैती का दंड जुर्माना सहित या रहित आजीवन कारावास या ऐसा कठिन कारावास है, जो दस वर्ष तक की अवधि का हो सकता है । क इसलिए जुर्माने सहित या रहित आजीवन कारावास या कारावास से दंडनीय है ।
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