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भारतीय न्याय संहिता, 2023

भारतीय न्याय संहिता, 2023/अध्याय 14/251 / 358

251अपराधी को बचाने के प्रतिफलस्वरूप उपहार की प्रस्थापना या संपत्ति का प्रत्यावर्तन

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 104–105स्रोत

पुराना कानून

भारतीय दंड संहिता, 1860

आईपीसी से मिलान जल्द

जो कोई, किसी व्यक्ति को कोई अपराध उस व्यक्ति द्वारा छिपाए जाने के लिए या उस व्यक्ति द्वारा किसी व्यक्ति को किसी अपराध के लिए विधिक दंड से बचाए जाने के लिए या उस व्यक्ति द्वारा किसी व्यक्ति को विधिक दंड दिलाने के प्रयोजन से उसके विरुद्ध की जाने वाली कार्यवाही न की जाने के लिए प्रतिफलस्वरूप कोई परितोषण देता है या दिलाता है या देने या दिलाने की प्रस्थापना या करार करता है, या कोई संपत्ति प्रत्यावर्तित करता है या कराता है,—

(क) यदि वह अपराध मृत्यु से दंडनीय हो, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा :

(ख) यदि वह अपराध आजीवन कारावास से या दस वर्ष तक के कारावास से दंडनीय हो, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ;

(ग) यदि वह अपराध दस वर्ष से कम के कारावास से दंडनीय हो, तो वह उस अपराध के लिए उपबंधित भांति के कारावास से इतनी अवधि के लिए, जो उस अपराध के लिए उपबंधित कारावास की दीर्घतम अवधि की एक-चौथाई तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा । अपवाद—इस धारा और धारा 250 के उपबंध ऐसे किसी मामले को विस्तारित नहीं

होते जिसमें अपराध का विधिपूर्वक शमन किया जा सके ।

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