भारतीय न्याय संहिता, 2023/अध्याय 14/230 / 358
230मृत्यु से दंडनीय अपराध के लिए दोषसिद्धि कराने के आशय से मिथ्या साक्ष्य देना या गढ़ना
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 99स्रोत
पुराना कानून
भारतीय दंड संहिता, 1860
आईपीसी से मिलान जल्द(1) जो कोई, भारत में तत्समय प्रवृत्त विधि के द्वारा मृत्यु से दंडनीय अपराध के लिए किसी व्यक्ति को दोषसिद्ध कराने के आशय से या संभाव्यतः उसके द्वारा दोषसिद्ध करवाता है यह जानते हुए मिथ्या साक्ष्य देता है या गढ़ता है, वह आजीवन कारावास से, या कठोर कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा, और पचास हजार रुपए तक के जुर्माने का भी दायी होगा ।
(2) यदि निर्दोष व्यक्ति को उपधारा (1) में निर्दिष्ट ऐसे मिथ्या साक्ष्य के परिणामस्वरूप दोषसिद्ध किया जाए, और उसे निष्पादित किया जाए, तो उस व्यक्ति को, जो ऐसा मिथ्या साक्ष्य देता है, या तो मृत्यु दंड या उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट दंड दिया जाएगा ।
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