भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/द्वितीय अनुसूची/33 / 58
प्ररूप 33आरोप
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 446–448स्रोत
पुराना प्ररूप
दंड प्रक्रिया संहिता, 1973
I. एक शीर्ष आरोप
(1) (क) मैं……(मजिस्ट्रेट का नाम और पद, आदि) आप……(अभियुक्त व्यक्ति का नाम) पर निम्नलिखित आरोप लगाता हूं :—
(ख) धारा 147 पर—आपने तारीख……को, या उसके लगभग……में भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध किया और उसके द्वारा आपने ऐसा अपराध किया जो भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 147 के अधीन दंडनीय अपराध है, और इस न्यायालय के संज्ञान के अंतर्गत है ।
(ग) और मैं इसके द्वारा निदेश देता हूं कि आपका इस न्यायालय द्वारा उक्त आरोप पर विचारण किया जाए ।
(मजिस्ट्रेट के हस्ताक्षर और मुद्रा)
[(ख) के स्थान पर प्रतिस्थापित किया जाए] :—
(2) धारा 151 पर—आपने तारीख……को या उसके लगभग……भारत के राष्ट्रपति [या यथास्थिति…… (राज्य का नाम) के राज्यपाल] को ऐसे राष्ट्रपति (या यथास्थिति, राज्यपाल) के रूप में अपनी विधिपूर्ण शक्ति का प्रयोग करने से विरत रहने के लिए उत्प्रेरित करने के आशय से ऐसे राष्ट्रपति (या यथास्थिति, राज्यपाल) पर हमला किया, और उसके द्वारा आपने ऐसा अपराध किया जो भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 151 के अधीन दंडनीय है और इस न्यायालय के संज्ञान के अंतर्गत हैं ।
(3) धारा 198 पर—आपने तारीख……को या उसके लगभग……में ऐसा आचरण किया (या यथास्थिति, करने का लोप किया) जो……अधिनियम की धारा……के उपबंधों के प्रतिकूल है और जिसके बारे में आपको ज्ञात था कि वह……पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला है, और उसके द्वारा आपने ऐसा अपराध किया जो भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 198 के अधीन दंडनीय है और इस न्यायालय के संज्ञान के अंतर्गत है ।
(4) धारा 229 पर—आपने तारीख……को या उसके लगभग……में…… के समक्ष……के विचारण के अनुक्रम में साक्ष्य में कथन किया कि “……” जिस कथन के मिथ्या होने का आपको ज्ञान या विश्वास था, या जिसके सत्य होने का आपको विश्वास नहीं था ; और उसके द्वारा आपने ऐसा अपराध किया जो भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 229 के अधीन दंडनीय है और इस न्यायालय के संज्ञान के अंतर्गत है ।
(5) धारा 105 पर—आपने तारीख……को या उसके लगभग……में हत्या की कोटि में न आने वाला आपराधिक मानववध किया जिससे……की मृत्यु कारित हुई और उसके द्वारा आपने ऐसा अपराध किया जो भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 105 के अधीन दंडनीय है और इस न्यायालय के संज्ञान के अंतर्गत है ।
(6) धारा 108 पर—आपने तारीख ……को या उसके लगभग……में क, ख, द्वारा जो कि मत्त अवस्था में था, आत्महत्या किए जाने का दुष्प्रेरण किया और उसके द्वारा आपने ऐसा अपराध किया जो भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 108 के अधीन दंडनीय है और इस न्यायालय के संज्ञान के अंतर्गत है ।
(7) धारा 117(2) पर—आपने तारीख……को या उसके लगभग ……में……को स्वेच्छया घोर उपहति कारित की और उसके द्वारा आपने ऐसा अपराध किया जो भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 117(2) के अधीन दंडनीय है और इस न्यायालय के संज्ञान के अंतर्गत है ।
(8) धारा 309(2) पर—आपने तारीख……को या उसके लगभग…… में……(नाम लिखिए) को लूटा और उसके द्वारा आपने ऐसा अपराध किया जो भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 309(2) के अधीन दंडनीय है और इस न्यायालय के संज्ञान के अंतर्गत है ।
(9) धारा 310(2) पर—आपने तारीख ……को या उसके लगभग…… में डकैती डाली जो अपराध भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 310(2) के अधीन दंडनीय है और इस न्यायालय के संज्ञान के अंतर्गत है।
II. दो या अधिक शीर्ष वाले आरोप
(1) (क) मैं……(मजिस्ट्रेट का नाम और पद, आदि) आप……(अभियुक्त व्यक्ति का नाम) पर निम्नलिखित आरोप लगाता हूं :—-
(ख) धारा 179 पर—पहला—आपने तारीख……को या उसके लगक्षग……में एक सिक्का यह जानते हुए कि वह कूटकृत है, क, ख नाम के एक अन्य व्यक्ति को असली के रूप में परिदत्त किया और उसके द्वारा आपने ऐसा अपराध किया जो भारतीय न्याय संहिता, 2023 धारा 179 के अधीन दंडनीय है और सेशन न्यायालय के संज्ञान के अंतर्गत है ।
दूसरा—आपने तारीख……को या उसके लगभग……में एक सिक्का यह जानते हुए कि वह कूटकृत है, क, ख नाम के एक अन्य व्यक्ति को असली सिक्के के रूप में लेने के लिए उत्प्रेरित करने का प्रयत्न किया और उसके द्वारा आपने ऐसा अपराध किया जो भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 179 के अधीन दंडनीय है और सेशन न्यायालय के संज्ञान के अंतर्गत है ।
(ग) और मैं इसके द्वारा निदेश देता हूं कि आपका उक्त न्यायालय द्वारा उक्त आरोप पर विचारण किया जाए ।
(मजिस्ट्रेट के हस्ताक्षर और मुद्रा)
[(ख) के स्थान पर प्रतिस्थापित किया जाए ] :—
(2) धारा 103 और 105 पर—पहला—आपने तारीख……को या उसके लगभग……में ……की मृत्यु कारित करके हत्या की और उसके द्वारा आपने ऐसा अपराध किया जो भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 103 के अधीन दंडनीय है और सेशन न्यायालय के संज्ञान के अंतर्गत है ।
दूसरा—आपने तारीख……को या उसके लगभग……में……की मृत्यु कारित करके हत्या की कोटि में न आने वाला मानववध किया और उसके द्वारा आपने ऐसा अपराध किया जो भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 105 के अधीन दंडनीय है और सेशन न्यायालय के संज्ञान के अंतर्गत है ।
(3) धारा 303(2) और 307 पर—पहला—आपने तारीख……को या उसके लगभग ……में चोरी की और उसके द्वारा आपने ऐसा अपराध किया जो भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 303(2) के अधीन दंडनीय है और सेशन न्यायालय के संज्ञान के अंतर्गत है ।
दूसरा—आपने तारीख……को या उसके लगभग……में, चोरी करने के लिए किसी व्यक्ति की मृत्यु कारित करने की तैयारी करके, चोरी की और उसके द्वारा आपने ऐसा अपराध किया जो भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 307 के अधीन दंडनीय है और सेशन न्यायालय के संज्ञान के अंतर्गत है ।
तीसरा—आपने तारीख ……को या उसके लगभग……में, चोरी करने के पश्चात् निकल भागने के लिए किसी व्यक्ति का अवरोध कारित करने की तैयारी करके, चोरी की और उसके द्वारा आपने ऐसा अपराध किया जो भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 307 के अधीन दंडनीय है और सेशन न्यायालय के संज्ञान के अंतर्गत है ।
चौथा—आपने तारीख ……को या उसके लगभग……में चोरी द्वारा ली गई संपत्ति को प्रतिधारित करने की दृष्टि से किसी व्यक्ति को उपहति का भय कारित करने की तैयारी करके चोरी की और उसके द्वारा आपने ऐसा अपराध किया जो भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 307 के अधीन दंडनीय है और सेशन न्यायालय के संज्ञान के अंतर्गत है ।
(4) धारा 229 पर अनुकल्पी आरोप—आपने तारीख……को या उसके लगभग …… में……के समक्ष……की जांच के अनुक्रम में साक्ष्य में कथन किया कि “……” और आपने तारीख ……को या उसके लगभग……में……के समक्ष……के विचारण के अनुक्रम में साक्ष्य में कथन किया कि “……” जिन दो कथनों में से एक के मिथ्या होने का आपको ज्ञान या विश्वास था या उसके सत्य होने का आपको विश्वास नहीं था और उसके द्वारा आपने ऐसा अपराध किया जो भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 229 के अधीन दंडनीय है और सेशन न्यायालय के संज्ञान के अंतर्गत है ।
(मजिस्ट्रेटों द्वारा विचारित किए जाने वाले मामलों में “सेशन न्यायालय के संज्ञान के अंतर्गत है” के स्थान पर “मेरे संज्ञान के अंतर्गत है” लिखिए ।
III. पूर्व दोषसिद्धि के पश्चात् चोरी के आरोप
मैं……(मजिस्ट्रेट का नाम और पद आदि) आप……(अभियुक्त व्यक्ति का नाम) पर निम्नलिखित आरोप लगाता हूं :—
यह कि आपने तारीख ……को या उसके लगभग ……में चोरी की और उसके द्वारा आपने ऐसा अपराध किया जो भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 303(2) के अधीन दंडनीय है और सेशन न्यायालय (या, यथास्थिति, मजिस्ट्रेट) के संज्ञान के अंतर्गत है ।
और आप, उक्त……(अभियुक्त का नाम) पर यह भी आरोप है कि आप उक्त अपराध करने के पूर्व अर्थात् तारीख ……को……के……(वह न्यायालय लिखिए जिसके द्वारा दोषसिद्धि की गई थी) द्वारा भारतीय न्याय संहिता, 2023 के अध्याय 17 के अधीन तीन वर्ष की अवधि के लिए कारावास से दंडनीय अपराध के लिए, अर्थात् रात्री में गृह-भैदन के अपराध……(उस धारा के शब्दों में अपराध का वर्णन कीजिए जिसके अधीन अभियुक्त दोषसिद्ध किया गया था) के लिए दोषसिद्ध किए गए थे जो दोषसिद्धि अब तक पूर्णतया प्रवृत्त और प्रभावशील है और आप भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 13 के अधीन परिवर्धित दंड से दंडनीय हैं ।
और मैं इसके द्वारा निदेश देता हूं कि आपका विचारण किया जाए, इत्यादि ।
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