दंड प्रक्रिया संहिता, 1973/द्वितीय अनुसूची/32 / 57
प्ररूप 32आरोप
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भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू
I. एक शीर्ष आरोप
(1) (क) मैं…… (मजिस्ट्रेट का नाम और पद, आदि) आप……(अभियुक्त व्यक्ति का नाम) पर निम्नलिखित आरोप लगाता हूं :—
(ख) धारा 121। पर—आपने तारीख……को, या उसके लगभग……में भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध किया और उसके द्वारा आपने ऐसा अपराध किया जो भारतीय दंड संहिता की धारा 121 के अधीन दंडनीय अपराध है, और इस न्यायालय के संज्ञान के अंतर्गत है ।
(ग) और मैं इसके द्वारा निदेश देता हूं कि आपका इस न्यायालय द्वारा उक्त आरोप पर विचारण किया जाए।
(मजिस्ट्रेट के हस्ताक्षर और मुद्रा)
[(ख) के स्थान पर प्रतिस्थापित किया जाए] :—
(2) धारा 124 पर—आपने तारीख……को या उसके लगभग……भारत के राष्ट्रपति [या यथास्थिति (राज्य का नाम) के राज्यपाल] को ऐसे राष्ट्रपति (या यथास्थिति, राज्यपाल) के रूप में अपनी विधिपूर्ण शक्ति का प्रयोग
करने से विरत रहने के लिए उप्रेरित करने के आशय से ऐसे राष्ट्रपति (या यथास्थिति, राज्यपाल) पर हमला किया, और उसके द्वारा आपने ऐसा अपराध किया जो भारतीय दंड संहिता की धारा 124 के अधीन दंडनीय है और इस न्यायालय के संज्ञान के अंतर्गत हैं ।
(3) धारा 161। पर—आपने……विभाग में लोक सेवक होते हुए……(नाम लिखिए) से अन्य पक्षकार……(नाम लिखिए) के लिए पदीय कार्य से प्रविरत रहने के लिए वैध पारिश्रमिक से भिन्न परितोषण प्रत्यक्षतः स्वीकार किया, और उसके द्वारा आपने ऐसा अपराध किया जो भारतीय दंड संहिता की धारा 161] के अधीन दंडनीय है और इस न्यायालय के संज्ञान के अंतर्गत है।
(4) धारा 166 पर—आपने तारीख……को या उसके लगभग……में ऐसा आचरण किया (या यथास्थिति, करने का लोप किया) जो……अधिनियम की धारा……के उपबंधों के प्रतिकूल है और जिसके बारे में आपको ज्ञात था कि वह……पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला है, और उसके द्वारा आपने ऐसा अपराध किया जो भारतीय दंड संहिता की धारा 166 के अधीन दंडनीय है और इस न्यायालय के संज्ञान के अंतर्गत है ।
(5) धारा 193 पर—आपने तारीख……को या उसके लगभग……में…… के समक्ष……के विचारण के अनुक्रम में साक्ष्य में कथन किया कि “……” जिस कथन के मिथ्या होने का आपको ज्ञान था या विश्वास था या, जिसके सत्य होने का आपको विश्वास नहीं था ; और उसके द्वारा आपने ऐसा अपराध किया था भारतीय दंड संहिता की धारा 193 के अधीन दंडनीय है और इस न्यायालय के संज्ञान के अंतर्गत है।
(6) धारा 304 पर—आपने तारीख……को या उसके लगभग……में हत्या की कोटि में न आने वाला आपराधिक मानववध किया जिससे……की मृत्यु कारित हुई और उसके द्वारा आपने ऐसा अपराध किया जो भारतीय दंड संहिता की धारा 304 के अधीन दंडनीय है और इस न्यायालय के संज्ञान के अंतर्गत है ।
(7) धारा 306 पर—आपने तारी ……को या उसके लगभग……में क, ख, द्वारा जो कि मृत अवस्था में था, आत्महत्या किए जाने का दुप्रेरण किया और उसके द्वारा आपने ऐसा अपराध किया जो भारतीय दंड संहिता की धारा 306 के अधीन दंडनीय है और इस न्यायालय के संज्ञान के अंतर्गत है ।
(8) धारा 325 पर—आपने तारीख……को या उसके लगभग ……में……को स्वेच्छया घोर उपहति कारित की और उसके द्वारा आपने ऐसा अपराध किया जो भारतीय दंड संहिता की धारा 325 के अधीन दंडनीय है और इस न्यायालय के संज्ञान के अंतर्गत है।
(9) धारा 392 पर—आपने तारीख……को या उससे लगभग…… में……(नाम लिखिए) को लूटा और उसके द्वारा आपने ऐसा अपराध किया जो भारतीय दंड संहिता की धारा 392 के अधीन दंडनीय है और इस न्यायालय के संज्ञान के अंतर्गत है ।
(10) धारा 395 पर—आपने तारीख ……को या उसके लगभग…… में डकैती डाली जो अपराध भारतीय दंड संहिता की धारा 392 के अधीन दंडनीय है और इस न्यायालय के संज्ञान के अंतर्गत है ।
II. दो या अधिक शीर्ष वाले आरोप
(1) (क) मैं……(मजिस्ट्रेट का नाम और पद, आदि) आप……(अभियुक्त शक्ति का नाम) पर निम्नलिखित आरोप लगाता हूं :—
(ख) धारा 241। पर—पहला—आपने तारीख……को या उसके लगभग……में एक सिक्का यह जानते हुए कि वह कूटकृत है, क, ख नाम के एक अन्य व्यक्ति को असली के रूप में परिदत्त किया और उसके द्वारा आपने ऐसा अपराध किया जो भारतीय दंड संहिता की धारा 241 के अधीन दंडनीय है और सेशन न्यायालय के संज्ञान के अंतर्गत है ।
दूसरा—आपने तारीख……को या उसके लगभग……में एक सिक्का यह जानते हुए कि वह कूटकृत है, क, ख नाम के एक अन्य व्यक्ति को असली सिक्के के रूप में लेने के लिए उप्रेरित करने का प्रयत्न किया और उसके द्वारा आपने ऐसा अपराध किया जो भारतीय दंड संहिता की धारा 241 के अधीन दंडनीय है और सेशन न्यायालय के संज्ञान के अंतर्गत है ।
(ग) और मैं इसके द्वारा निदेश देता हूं कि आपका उक्त न्यायालय द्वारा उक्त आरोप पर विचारण किया जाए।
(मजिस्ट्रेट के हस्ताक्षर और मुद्रा)
[(ख) के स्थान पर प्रतिस्थापित किया जाए ] :—
(2) धारा 302 और 304 पर—पहला—आपने तारीख……को या उसके लगभग……में ……की मृत्यु कारित करके हत्या की और उसके द्वारा आपने ऐसा अपराध किया जो भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के अधीन दंडनीय है और सेशन न्यायालय के संज्ञान के अंतर्गत है ।
दूसरा—आपने तारीख……को या उसके लगभग……में……की मृत्यु कारित करके हत्या की कोटि में न आने वाला मानववध किया और उसके द्वारा आपने ऐसा अपराध किया जो भारतीय दंड संहिता की धारा 304 के अधीन दंडनीय है और सेशन न्यायालय के संज्ञान के अंतर्गत है।
(3) धारा 379. और 382. पर—पहला—आपने तारीख……को या उसके लगभग ……में चोरी की और उसके द्वारा आपने ऐसा अपराध किया जो भारतीय दंड संहिता की धारा 379 के अधीन दंडनीय है और सेशन न्यायालय के संज्ञान के अंतर्गत है।
दूसरा—आपने तारीख……को या उसके लगभग……में चोरी करने के लिए किसी व्यक्ति की मृत्यु कारित करने की तैयारी करके, चोरी की और उसके द्वारा आपने ऐसा अपराध किया जो भारतीय दंड संहिता की धारा 382 के अधीन दंडनीय है और सेशन न्यायालय के संज्ञान के अंतर्गत है।
तीसरा—आपने तारीख ……को या उसके लगभग……में, चोरी करने के पश्चात् निकल भागने के लिए किसी व्यक्ति का अवरोध कारित करने की तैयारी करके, चोरी की और उसके द्वारा आपने ऐसा अपराध किया जो भारतीय दंड संहिता की धारा 382 के अधीन दंडनीय है और सेशन न्यायालय के संज्ञान के अंतर्गत है ।
चौथा—आपने तारीख ……को या उसके लगभग……में चोरी द्वारा ली गई संपत्ति को प्रतिधारित करने की दृष्टि से किसी व्यक्ति को उपहति का भय कारित करने की तैयारी करके चोरी की और उसके द्वारा आपने ऐसा अपराध किया जो भारतीय दंड संहिता की धारा 382 के अधीन दंडनीय है और सेशन न्यायालय के संज्ञान के अंतर्गत है।
(4) धारा 193 पर अनुकल्पी आरोप—आपने तारीख……को या उसके लगभग……में……के समक्ष……की जांच के अनुक्रम में साक्ष्य में कथन किया “……” और आपने तारीख ……को या उसके लगभग……में……के समक्ष……के विचारण के अनुक्रम में साक्ष्य में कथन किया कि “……” जिन दो कथनों में से एक के मिथ्या होने का आपको ज्ञान या विश्वास था या उसके सत्य होने का आपको विश्वास नहीं था और उसके द्वारा आपने ऐसा अपराध किया जो भारतीय दंड संहिता की धारा 193 के अधीन दंडनीय है और सेशन न्यायालय के संज्ञान के अंतर्गत है ।
(मजिस्ट्रेटों द्वारा विचारित किए जाने वाले मामलों में “सेशन न्यायालय के संज्ञान के अंतर्गत है” के स्थान पर “मेरे संज्ञान के अंतर्गत है” लिखिए ।
III. पूर्व दोषसिद्धि के पश्चात् चोरी के आरोप
मैं……(मजिस्ट्रेट का नाम और पद आदि) आप……(अभियुक्त व्यक्ति का नाम) पर निम्नलिखित आरोप लगाता हूं :—
यह कि आपने तारीख ……को या उसके लगभग ……में चोरी की और उसके द्वारा आपने ऐसा अपराध किया जो भारतीय दंड संहिता की धारा 379 के अधीन दंडनीय है और सेशन न्यायालय (या, यथास्थिति, मजिस्ट्रेट) के संज्ञान के अंतर्गत है और आप, उक्त……(अभियुक्त का नाम) पर यह भी आरोप है कि आप उक्त अपराध करने के पूर्व अर्थात् तारीख ……को……के……(वह न्यायालय लिखिए जिसके द्वारा दोषसिद्धि की गई थी) द्वारा भारतीय दंड संहिता के अध्याय 17 के अधीन तीन वर्ष की अवधि के लिए कारावास से दंडनीय अपराध के लिए, अर्थात् रात्रौ गृह-भेदन के अपराध……(उस धारा के शब्दों में अपराध का वर्णन कीजिए जिसके अधीन अभियुक्त दोषसिद्ध किया गया था) के लिए दोषसिद्ध किए गए थे जो दोषसिद्धि अब तक पूर्णतया प्रवृत्त और प्रभावशील है और आप भारतीय दंड संहिता की धारा 75 के अधीन परिवर्धित दंड से दंडनीय हैं ।
और मैं इसके द्वारा निदेश देता हूं कि आपका विचारण किया जाए, इत्यादि ।
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