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दंड प्रक्रिया संहिता, 1973

दंड प्रक्रिया संहिता, 1973/द्वितीय अनुसूची/41 / 57

प्ररूप 41दंडादेश के लघुकरण के पश्चात् वारण्ट

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 199स्रोत

यह प्ररूप बदल दिया गया है

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू

(धाराएं 286, 413, 416 देखिए)

प्रेषिती—

……(स्थान) की जेल का भारसाधक अधिकारी तारीख……को हुए सेशन में ……(बंदी का नाम), जो उक्त सेशन में [19……के कलेण्डर के मामला संख्यांक…… में बंदी (या, यथास्थिति, पहला, दूसरा, तीसरा बंदी) है, भारतीय दंड संहिता की धारा……के अधीन दंडनीय……के अपराध के लिए दोषसिद्ध किया गया था और……के लिए दंडादिष्ट किया गया था और तब आपकी अभिरक्षा में सुपुर्द किया गया था तथा……के……न्यायालय के आदेश द्वारा (जिसकी दूसरी प्रति इसके साथ संलग्न है) उक्त दंडादेश द्वारा न्यायनिर्णीत दंड का आजीवन कारावास……के दंड के रूप में लघुकरण किया गया है ;

इसलिए आपको प्राधिकृत किया जाता है और आपसे अपेक्षा की जाती है कि आप उक्त…… (बंदी का नाम) को उक्त जेल में अपनी अभिरक्षा में, विधि द्वारा अपेक्षित रूप में, तब तक सुरक्षित रखें जब तक वह उक्त आदेश के अधीन आजीवन कारावास का दंड भुगतने के प्रयोजन के लिए आपके द्वारा समुचित प्राधिकारी को और अभिरक्षा में परिदत्त न कर दिया जाए,

अथवा

यदि कम किया गया दंडादेश कारावास का है तो “ उक्त जेल में अपनी अभिरक्षा में” शब्दों के पश्चात् लिखिए “सुरक्षित रखें और वहां उक्त आदेश के अधीन कारावास के दंड को विधि के अनुसार निष्पादित करें” ।

ता० ……(हस्ताक्षर

(न्यायालय की मुद्रा)

संशोधन टिप्पणियां

  1. 1978 के अधिनियम सं० 45 की धारा 35 द्वारा “(धारा 386 देखिए)” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।

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